भोपाल। प्रदेश में ओलावृष्टि से प्रभावित गांवों की संख्या बढ़ती जा रही है। 13 जिलों में 621 गांवों के प्रभावित होने की प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार के पास पहुंची है। यहां 27 हजार हेक्टेयर की फसल खराब हुई है। नुकसान को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को आपात बैठक बुलाई।

इसमें अफसरों को निर्देश दिए कि सर्वे में कोताही न बरतें और नुकसान की भरपाई करें। किसानों के नाम मुख्यमंत्री ने अपील भी जारी की। इसमें किसानों से कहा कि वे चिंता न करें। राहत और बीमा से नुकसान की भरपाई करेंगे। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने ओलावृष्टि से प्रभावित गांवों का दौरा किया।

ओलावृष्टि को लेकर मुख्यमंत्री ने बुधवार सुबह मुख्यमंत्री निवास पर वरिष्ठ अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई। इसमें कृषि और राजस्व विभाग के अफसरों से उन्होंने ओला प्रभावित गांव और फसलों का ब्योरा लिया। बैठक में उन्होंने राजस्व विभाग को निर्देश दिए कि सर्वे का काम तत्काल शुरू किया जाए। इसमें पूरी पारदर्शिता रखी जाए। नुकसान के आकलन को पंचायतों में चस्पा किया जाए। इसमें किसी को आपत्ति होती है तो तत्काल सुधार भी किया जाए।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 13 जिलों के 621 गांवों में ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है। भोपाल, विदिशा, सीहोर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, देवास और होशंगाबाद जिले में ज्यादा नुकसान होने की रिपोर्ट है।

लगभग 27 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की फसल प्रभावित हुई है। बैठक में मुख्य सचिव बीपी सिंह, अपर मुख्य सचिव वित्त एपी श्रीवास्तव, कृषि उत्पादन आयुक्त पीसी मीना, प्रमुख सचिव कृषि राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव राजस्व अरुण पांडे, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल और एसके मिश्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने सीहोर के नसरुल्लागंज तहसील के कई ओला प्रभावित गांवों में फसलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से बात की और भरोसा दिलाया कि संकट की घड़ी में सरकार उनके साथ है।

मुख्यमंत्री ने पिपलानी, किशनगंज, बाईंबोडी, इटावा खुर्द, चीचली, बोरखेड़ा और जाट मुहाई में प्रभावित फसलों का निरीक्षण किया। साथ ही किसानों से कहा कि उन्हें फसल बीमा के अलावा 30 हजार रुपए हेक्टेयर राहत राशि, कर्ज वसूली स्थगित करने के साथ कन्या विवाह पर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत लाभांवित किया जाएगा।