भोपाल (ब्यूरो)। कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में दूसरों की शिकायत पर कार्रवाई करने वाली पुलिस के खिलाफ भी ढेरों शिकायतें हैं। ज्यादातर मामले रिश्वत के हैं। पुलिसकर्मियों पर दो हजार से लेकर सवा तीन लाख रुपए मांगने तक के मामलों में जांचें हो रहीं हैं। यह खुलासा सोमवार को विधानसभा में गृहमंत्री बाबूलाल गौर के जवाब से हुआ।

आरिफ अकील ने पुलिस की रिश्वतखोरी और झूठे प्रकरणों में फंसाने की शिकायतों पर गृहमंत्री से सवाल किया था। इसका लिखित उत्तर देते हुए गृहमंत्री ने बताया कि सभी जगहों से ऐसी शिकायतें हैं। 2011 में भोपाल में पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत थी। इसमें ब्लेकमेल कर सवा तीन लाख रुपए लेने की भी थी। भाजपा नेता दिलीप मेहरा ने श्यामला हिल्स थाना प्रभारी केके जैन के खिलाफ बदमाश द्वारा घर में जुआघर चलाना और थाना प्रभारी को 30 हजार रुपए देने की शिकायत की थी।

नगर पुलिस अधीक्षक से कराई गई जांच में ये गलत निकली, लेकिन थाना क्षेत्र में जुआ रेड होने पर निरीक्षक को सौ रुपए का अर्थदण्ड दिया गया। इसी तरह छोला थाने के उप निरीक्षक आरबी कटियार और सहायक उप निरीक्षक कुंजीलाल को रिश्वत मांगने और गालीगलौच कर प्रताड़ित करने का दोष पाते हुए दो वार्षिक वेतनवृद्धि रोकी गई।

राजेन्द्र रघुवंशी ने आरक्षक शिवनाथ रघुवंशी के खिलाफ ब्लेकमेल कर सवा तीन लाख रुपए मांगने की शिकायत की। जांच में शिवराथ का आचरण संदिग्ध पाया गया और विभागीय कार्रवाई करने का प्रकरण पुलिस अधीक्षक दक्षिण को भेजा गया है। इसी तरह 2012 में बैंक में रुपए डालने के बहाने लेकर वापस न करने से लेकर रिश्वत की चार अन्य शिकायत हुई। अधिकांश में एक हजार रुपए का अर्थदण्ड लगाया गया।