भोपाल (स्टेट ब्यूरो)। सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 साल करने से प्रदेश के सामान्य वर्ग को हो रहे पांच साल के नुकसान का मुद्दा बुधवार को कैबिनेट में उठा। इस मुद्दे पर मंत्री जब एक साथ अपनी बात रखने लगे तो बहस जैसी स्थिति निर्मित हो गई।

सूत्रों के मुताबिक उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी विस्तार से बता रहे थे कि किस तरह यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने से पहले ही वापस ले लिया गया। इसे दिखवाया जा रहा है। इस दौरान खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर किसी दूसरे विषय को उठाने लगे। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने उन्हें समझाया कि पहले एक विषय पूरा हो जाए तब दूसरा उठाया जाए। लेकिन तोमर अपनी बात कहते रहे जिस पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) मंत्री सुखदेव पांसे समेत कुछ अन्य मंत्रियों ने तोमर को टोकते हुए कहा कि यदि सभी लोग एक साथ बात करेंगे तो कैसे सुनाई देगी। इस बात को लेकर तोमर नाराज हो गए। सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ गोविंद सिंह ने बैठक में कहा कि सामान्य वर्ग की आयु सीमा कम हो रही है यह हमारी जानकारी में नहीं था। अन्य मंत्रियों ने भी कहा कि इस फैसले के बाद लोग अपनी आपत्तियां लेकर हमारे पास आ रहे हैं।

40 वर्ष हो सकती है अधिकतम आयु सीमा

बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि आयु सीमा बढ़ाने के मामले का विधि विभाग से परीक्षण कराया जाए। छत्तीसगढ़ की तर्ज पर यहां भी 40 साल अधिकतम आयु सीमा की जा सकती है। माना जा रहा है कि सरकार सभी के लिए एक समान 40 वर्ष अधिकतम आयु सीमा करने का फैसला कर सकती है।