संस्कृति मंत्रालय बनाने से कुछ नहीं होगा, नीतियां बनाएं

- रवींद्र भवन में दुर्लभ वाद्य प्रसंग का समापन

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

सरकार ने कला व संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय तो बना दिया, लेकिन इतना काफी नहीं होता। केवल जगह-जगह आयोजन किए जाते हैं। संगीत शिक्षा देना भी तो जरूरी है, उसकी व्यवस्था कौन करेगा? यदि वास्तव में बढ़ावा देना ही है तो नीति बनानी होगी। साथ ही कलाकारों को रोजगार भी उपलब्ध कराना होगा। यह कहना है संतूर वादक अभय रुस्तम सोपोरी का। वे रवींद्र भवन में आयोजित दुर्लभ वाद्य प्रसंग में प्रस्तुति के लिए आए थे। उन्होंने कहा कि सरकार जिस प्रकार खेलकूद में अच्छे प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को रोजगार व सहायता मुहैया कराती है। ठीक उसी प्रकार संगीत व अन्य कलाओं के कलाकारों के लिए भी नीतियां बनाई जानी चाहिए।

मेरे पिता ने संतूर को दिया है एक खास स्तर

उन्होंने कहा कि कॉलेज में संगीत विषय अनिवार्य कर देना चाहिए। जिन कॉलेजों में संगीत शिक्षा दी जा रही है, वहां पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। युवा इस क्षेत्र में रुझान तब दिखाएंगे, जब उन्हें यहां भविष्य दिखाई देगा। सरकार को कम से कम ऐसे कलाकारों को तो रोजगार उपलब्ध करना चाहिए जो कि देश-विदेश में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। मेरे पिता भजन सोपोरी ने संतूर को ऐसे स्तर पर पहुंचाया है कि अब नया करने की जरूरत नहीं है। अब उसे साधे रखना है, मैंने इसमें स्ट्रनिंग कॉन्सेप्ट के साथ सस्टेन टेक्निक डेवलप की है। अभय कहते हैं, इन दिनों देश में संतूर की यदि बात करें तो सिर्फ दो नामों का जिक्र आता है। भोपाल में दो साल पहले भारत भवन में एक समारोह हुआ था, जहां लॉबिंग दिखाई दी थी। जबकि यह बहुत गलत काम है।

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सजी संगीत की खूबसूरत सभाएं

रवींद्र भवन में गुरुवार को दो दिवसीय दुर्लभ वाद्य प्रसंग समारोह का समापन हुआ। पद्मश्री उस्ताद अब्दुल लतीफ खां की स्मृति में उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में संगीत की खूबसूरत सभाएं सजी। अंतिम दिन समारोह की शुरुआत दिल्ली से आए भारत भूषण गोस्वामी के सारंगी वादन से हुई। प्रस्तुति के लिए उन्होंने राग मारू विहाग का चयन किया। राग को विस्तार देते हुए इसमें विलंबित एक ताल की बंदिश सुनाई। इसके बाद उन्होंने द्रुत तीन ताल की बंदिश पेश की। मिश्र खमाज राग में निबद्ध बनारस घराने की ठुमरी श्रृंगारिक की धुन सुनाकर प्रस्तुति का समापन किया।

चुना दुर्लभ राग 'नंद कौस'

दूसरी सभा में संतूर की आती-जाती धुनों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संतूर वादक अभय सोपोरी ने दुर्लभ राग नंद कौस से प्रस्तुति शुरू की। उन्होंने बताया कि यह राग तंत्र (तंतू वाद्य)में कम सुनने को मिलता है। इसमें उन्होंने आलाप, जोड़ के साथ पखावज और घटम पर बेहतर तालमेल दिखाया। इसी क्रम में सोपोरी ने छंदों पर आधारित बंदिश सुनाई। इस प्रस्तुति में तबला पर दुर्जय भौमिक, पखावज पर ऋषिशंकर उपाध्याय और घटम पर वरुण राज शेखरन ने लहरा दिया।