भोपाल। नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के बयान से कर्मचारी नाराज हैं। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि को बदले की भावना से जुड़ा बयान नहीं देना चाहिए। ऐसे बयान कर्मचारियों के मनोबल गिराता है।

बता दें कि प्रतिपक्ष ने गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी केपी यादव के नामांकन दाखिल कार्यक्रम में सोमवार को कर्मचारियों को देख लेने की बात कही थी। यह बयान मंगलवार को पूरे दिन मंत्रालय, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन में चर्चा का विषय रहा।

मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव उमाशंकर तिवारी ने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी शासन के हित में काम करते हैं। कोई भी सरकार हो, शासन के नियमों का पालन करना होता है। कर्मचारी ऐसा ही करते हैं। कर्मचारी हमेशा से आम जनता के हितों में काम करते आ रहे हैं। सरकार कोई भी हो, प्रदेश के कर्मचारियों को शासन के हितों में काम करना होता है। उसमें नियमों का पालन जरूरी है।

नेता प्रतिपक्ष के बयान से कर्मचारियों को दुख पहुंचा है। इधर, मप्र कर्मचारी कांग्रेस के अध्यक्ष वीरेंद्र खोंगल ने कहा कि इस समय चुनाव ड्यूटी कर रहे शासकीय सेवकों को चुनाव आयोग के निर्देश व शासन के हितों में काम करना पड़ रहा है, जो जरूरी है। ऐसे में कर्मचारियों के कामों को बदले की भावना से जोड़कर देखना गलत है। अन्य कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने भी बयान को कर्मचारियों के खिलाफ बताया है।

बता दें कि नेता प्रतिपक्ष भार्गव ने गुना-शिवपुरी संसदीय सीट पर भाजपा की तरफ से चुनाव लड़ रहे केपी यादव का नामांकन दाखिल करने गए थे। तब उनके वाहन को कुछ दूरी पर ही रोक लिया गया था। जिसके बाद उन्होंने कर्मचारियों को देख लेने की बात कही।