भोपाल। भारत भवन में अंतरराष्ट्रीय जनजातीय दिवस के अवसर पर आयोजित 'जनजातीय चित्र प्रदर्शनी' कला प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कैनवास पर सजे चित्रों में सजी प्रकृति और संदेश को दर्शकों से खूब सराहना मिली। रंगदशर्नी दीर्घा में सजे यह चित्र जनजातीय कला की कहानियां बताते हैं, जिसमें प्रकृति को देवी-देवताओं की तरह स्थान दिया गया है। इनमें पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, जलीय जीव, जंगली जानवर आदि को शामिल किया गया है। इस अवसर पर भील, गौंड और बैगा जनजातीय कलाकारों के 19 चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इन चित्रों में जंगल, पहाड़, नदियां और गांव की खूबसूरती की झलक देखने को मिलती है। जापानी श्याम ने ब्लैक एंड व्हाइट कलर से वट वृक्ष तैयार किया है। इस वृक्ष के नीची महिला-पुरष बैठ कर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने इस चित्र को ' पेड़ और पक्षी' शीर्षक दिया है। फुर्सत के पलों में लोग ऐसे ही प्रकृति के बीच बैठकर चर्चा करते हैं। सुखनंदनी पोयाम ने राहू का पेड़ शीर्षक से चित्र तैयार किया है। जिसमें बकरियों के साथ ही शेर और अन्य जंगली जीवों को दिखाया गया है। छोटी तेकाम ने 'गुरी की माता' शीर्षक से चित्र तैयार किया है। इसमें उन्होंने पेड़ पर चहचहाती चिड़िया और पेड़ के आसपास महिलाओं के चेहरे बनाए हैं, जो इस बात का प्रतीक हैं कि मनुष्यों का प्रकृति से गहरा नाता है। 15 कलाकारों की समूह चित्र प्रदर्शनी 29 अगस्त तक दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक चलेगी। इसमें सुभाष भील, रमेश कटारा, राम सिंह भाबोर, गीत बारिया, संतोषी श्याम, शकुन बाई बेगा, सुरेश, जंगल सिंह आदि के चित्रों को शामिल किया गया है।