भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। पहली क्लास पास अतरवती पहले किसी के सामने बोलने से कतराती थीं। न तो हस्ताक्षर कर पातीं और न बाहरी दुनिया की इतनी समझ थी कि किसी की मदद कर सकें। लेकिन अब स्मार्ट फोन से लेकर कागजी कार्यवाही तक वे खुद ही पूरी कर लेती हैं। आज देशभर में महिला हिंसा के खिलाफ होने वाले सम्मेलनों में वे मंच से बेधड़क बोलती हैं। महिला और बच्चियों के खिलाफ होने वाली हिंसा के खिलाफ दुर्गा का रूप भी धर लेती हैं। अदम्य इच्छा शक्ति और साहस की धनी अतरवती चौहान छिंदवाड़ा (मप्र) की रहने वाली हैं।

15 साल पहले वे बच्चों को पढ़ाने के लिए छिंदवाड़ा से भोपाल आ गईं और भोपाल के मीरानगर में रहने लगीं। 3 साल पहले वे महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बनाए गए शौर्य दल से जुड़ीं। इसके पहले वे बचपन और संगिनी संस्था के साथ जुड़कर महिलाओं व बच्चियों के साथ होने वाली हिंसा के खिलाफ आवाज उठाती रहीं। 3 साल पहले उनके पड़ोस में रहने वाली दो बालिकाओं के साथ उनका पिता यौन शोषण कर रहा था। दोनों बालिकाओं में से बड़ी बेटी ने अतरवती को अपनी छोटी बहन के साथ पिता द्वारा किए जा रहे यौन शोषण को रोकने की गुहार लगाई। इसके बाद अतरवती ने बालिकाओं की मां से बात की तो उन्होंने बदनामी के डर से चुप रहने के लिए कहा।

जब बालिकाओं के साथ पिता का व्यवहार नहीं बदला और उनकी मां खुद ही जलकर मर गई तब अतरवती ने दुर्गा का रूप धारण कर उन्हें बचाने की ठानी। चाइल्ड लाइन को फोन किया और पड़ोसी के पांचों बच्चों को रेस्क्यू कराकर बचाया। इसके बाद उस पिता के खिलाफ बालिकाओं के साथ मिलकर थाने में शिकायत दर्ज कराकर उसे जेल भिजवाया। अब पड़ोसी की तीन बेटियां बालिका गृह में रहकर पढ़ाई करा रही हैं और दो छोटे बच्चे शिशुगृह में रह रहे हैं। वे बच्चों से बीच-बीच में मिलती रहती हैं। इसके बाद अतरवती को महिला बाल विकास विभाग की ओर से 16 अगस्त को रानी अवंति बाई सम्मान से नवाजा गया।

बस्ती की महिलाओं को करती हैं जागरूक

अतरवती कहती हैं कि जब गांव में रहती थी तो इतनी समझ नहीं थी। किसी के मामले में पड़ने से डर लगता था, लेकिन आज इतनी साहसी हो गई हूं कि कुछ भी कर सकती हूं। बस्ती की महिलाओं को अत्म निर्भर बनने के लिए लगातार जागरूक कर रही हूं। उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है। वे आज दूसरों के घरों में खाना बनाती हैं और पति गाड़ी चलाते हैं। अतरवती कहती हैं कि खुद तो नहीं पढ़ सकी, लेकिन बच्चों को पढ़ाने की पूरी कोशिश कर रही हूं।

यूपी से अगवा की गई नाबालिग को बचाया

पिछले साल एक व्यक्ति ने उत्तरप्रदेश से अगवा कर भोपाल लाई गई नाबालिग बच्ची को बस्ती में रखा था। बच्ची तस्करों के चंगुल से भाग रही थी तभी अतरवती की नजर उस पर पड़ गई। उन्होंने डायल-100 को फोन कर पुलिस बुलाई और आरोपितों को पकड़वाया। बच्ची को 2 साल तक बालिका गृह में रखवाने के बाद वापस उसे उसके घर उप्र भिजवाया।

पांच बच्चियों का बाल विवाह रुकवाया

मीरानगर बस्ती की पांच बच्चियों को महाराष्ट्र ले जाकर बाल विवाह किया जा रहा था। जब अतरवती को पता चला तो उन्होंने पुलिस की मदद से वहां जाकर बच्चियों का विवाह रुकवाया। सभी बच्चियां आज स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। इसके अलावा एक वर्ष पहले बस्ती की एक महिला को उसके पति ने हथियार से मारा। उसके पति के खिलाफ महिला से थाने में एफआईआर दर्ज कराकर जेल भिजवाया। महिला के इलाज के लिए चंदा किया और निजी अस्पताल में 3 माह तक इलाज कराया। तीन माह तक अतरवती ने उस महिला के सभी बच्चों के खाने, सुरक्षा आदि की व्यवस्था स्वयं और समूह के साथ मिलकर निभाई।