भोपाल, राजीव सोनी। मध्यप्रदेश में सतपुड़ा की वादियों में बसे होशंगाबाद जिले के गांव छेड़का की प्रसिद्धि अब गांधीवादी गांव के रूप में होने लगी है। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से फैसला लेकर गांव को 'ग्रीन विलेज' की थीम पर भी विकसित करने का संकल्प लिया है। घरों की बाहरी दीवारों पर हरा रंग पोतने के साथ उन पर आकर्षक पेंटिंग उकेरी गई हैं। यह युक्ति कमाल कर रही है। गांव की हरीभरी छवि पर्यावरण संरक्षण का संदेश तो दे ही रही है, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व तक पहुंचने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को भी लुभा रही है। इससे यहां पर्यटन क्षेत्र से जुड़े रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं।

चार साल में कायापलट : अभावों का पर्याय रहे 800 की आबादी वाले छेड़का गांव का चार साल में ही कायापलट हो चुका है। यह संभव हुआ है एक गांधीवादी विचारक की सोच और प्रयास से। यह शख्स हैं आयकर विभाग में बतौर डायरेक्टर जनरल पदस्थ आरके पालीवाल। उन्होंने इस गांव को पिछड़ेपन से मुक्तकराने का बीड़ा उठाया है। गांधी ग्रामसेवा केंद्र भी मुहिम में मददगार बन गया है। सतपुड़ा के जंगल में अंतिम छोर पर बसे इस गांव से आठ किमी दूर प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मढ़ई भी मौजूद है।

यहां आने वाले पर्यटकों की भी रुचि अब इस गांव को देखने में बढ़ने लगी है। पालीवाल, गांधी ग्रामसेवा केंद्र से जुड़े कुछ संगठनों और गांधीवादियों के सुझाव पर आदिवासियों ने अपने घरों को हरे रंग से सजाने-संवारने की मुहिम शुरू की। गांव के 70-75 घरों की बाहरी दीवारों पर तोतापंखी हरा रंग चढ़ाया जा रहा है। गांव की सरपंच रेवती दिनेश धुर्वे बताती हैं कि हमारे पिछड़े गांव के भाग्य खुल गए हैं।

फाइवस्टार रिसोर्ट बनाम ग्रीन विलेज

गांधी केंद्र के सहयोगी हेमंत नागर, दिनेश धुर्वे कहते हैं, हमारे पड़ोसी गांव मढ़ई के निकट बड़े-बड़े रिसोर्ट बने हैं, जहां फाइव स्टार सुविधाएं जुटाई गई हैं, वहीं छेड़का अभावों से घिरा है। हमारे प्राकृतिक सुंदर घर इन फाइव स्टार रिसोर्ट को टक्कर दे सकते हैं।