धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। डिजिटल सुरक्षा के अभाव में देश में साल दर साल सायबर अपराध और ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। वर्ष 2012- 13 में हुए सायबर अपराधों पर गौर करें तो 8765 लोगों के साथ 67 करोड़ 65 लाख रुपए की ठगी हुई थी, लेकिन 2018 में संख्या बढ़कर 34,792 हो गई। इन लोगों से 207 करोड़ की ठगी की गई, जो एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए हुई। ये ब्योरा आरटीआई के तहत भारतीय रिजर्व बैंक ने सार्वजनिक किया है।

शिकार लोगों को राहत नहीं

सायबर ठगी के शिकार लोगों को बैंक द्वारा रकम वापस दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। भोपाल निवासी डॉ. प्रकाश अग्रवाल के सूचना का अधिकार के जवाब में रिजर्व बैंक ने बताया कि ठगी के मामलों में राहत देने के कोई निर्देश उसके द्वारा नहीं दिए गए। रिजर्व बैंक के पास ऐसा कोई आंकड़ा भी नहीं है कि जिन बैंकों ने एटीएम कार्ड बांटे हैं, उनमें कितने साक्षर और कितने निरक्षर हैं।

सीएनपी के कारण बढ़ रही ठगी

सायबर विशेषज्ञों की नजर में मुख्य वजह एटीएम कार्ड पेमेंट के ऑटोमेटिक फीचर कार्ड नॉट प्रेजेंट यानी 'सीएनपी" को माना गया है। पुराने कार्ड में यह फीचर नहीं होता था। बैंक सारे ग्राहकों को यह फीचर देता है पर बुजुर्ग, निरक्षर और घरेलू महिलाएं इसके प्रति जागरूक नहीं हैं, लिहाजा वे ठगी के शिकार हो जाते हैं। डॉ. अग्रवाल का कहना है कि बैंक को इसके दुष्परिणाम लोगों को समझाने चाहिए।