धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। उत्तरप्रदेश से लगे बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस को स्थानीय एंटी-इंकमबेंसी का सामना करना पड़ रहा है। ये एंटी इंकमबेंसी सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि मौजूदा विधायकों के खिलाफ है। ये जनता से दूरी, संवादहीनता और जातिगत छाप के कारण अलोकप्रिय हो गए हैं। ये बात दोनों ही पार्टियों के सर्वे में सामने आई है।

भाजपा तो विधायकों को पिछले एक साल से उनके कमजोर परफॉरमेंस को लेकर आगाह कर रही है और टिकट काटने की चेतावनी भी कई बार दे चुकी है। पर ज्यादा संकट कांग्रेस के सामने है क्योंकि पिछले 15 सालों से विपक्ष में होने के कारण कांगे्रस में स्थानीय लीडरशिप तैयार नहीं हो पाई है।

इसके चलते पार्टी के सामने धर्मसंकट है कि वह मौजूदा विधायक का टिकट काटे, तो दे किसे। वैसे पार्टी की रणनीति ये है कि वह मौजूदा विधायकों का टिकट नहीं काटेगी।

जनता हमें आशीर्वाद देगी खुद को दुरुस्त करेंगे

कांग्रेस प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी कहते हैं कि किसी रिपोर्ट की जानकारी तो मुझे नहीं है, पर ऐसा है तो भाजपा सरकार की विफलता के आधार पर हम जनता के आशीर्वाद से उसे दुरुस्त कर लेंगे। क्षेत्र की जनता के हित में काम करते रहे हैं, आगे भी करेंगे।

सड़क और सिंचाई सुविधाओं का जाल बिछाया

कोई एंटी इंकमबेंसी जैसी बात नहीं है। हमारी सरकार ने अधोसंरचना के क्षेत्र में पिछड़े बुंदेलखंड और विंध्य में सड़क और सिंचाई सुविधाओं का जाल बिछा दिया है। अंचल के लाखों लोगों का जीवन स्तर सुधरा है। आमदनी

बढ़ी है। पार्टी ने विधायकों को क्षेत्र में सक्रिय रहने के लिए भी प्रेरित किया है।

-डॉ. दीपक विजयवर्गीय, भाजपा के मुख्य प्रवक्ता

क्या कारण हैं नाराजगी के

  • विधायक बनते ही परिवारजन स्थानीय ठेकों में शामिल हो गए।
  • क्षेत्र में लोगों को दबंगई दिखाई। गुंडागर्दी को बढ़ावा दिया।
  • रातोंरात नए कारोबार खड़े कर लिए। कई गाड़ियां खरीद लीं।
  • संगठन के विभिन्न् पदों पर भी अपने लोगों को बिठा दिया।
  • अपनी जाति को छोड़ अन्य किसी की मदद नहीं की। जातिगत छाप पड़ गई।
  • नगर परिषद और अन्य स्थानीय चुनाव में अपने लोगों को टिकट दिया।

भाजपा आगाह कर चुकी है विधायकों को

चुनाव जीतने के बाद ज्यादातर विधायकों ने क्षेत्र की जनता के साथ संपर्क ही नहीं रखा। कुछ अन्य कारणों ने विधायक के खिलाफ माहौल खड़ा कर दिया है। दोनों ही दलों को यह समझ नहीं आ रहा है कि इस संकट से कैसे निपटा जाए। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने यहां के जिम्मेदारों को इस बारे में समझाइश भी दी है कि जनता के बीच जाना ही होगा साथ ही जनता की नाराजगी को कैसे भी समय रहते दूर करने की रणनीति बनानी होगी। उधर कांग्रेस के सामने तो विकल्पों का ही टोटा नजर आ रहा है।

यूपी का प्रभाव है क्षेत्र में

230 विधायकों वाली मध्यप्रदेश विधानसभा में 25 विधायक बुंदेलखंड से आते हैं और 29 विधायक विंध्य क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। कुल मिलाकर 54 विधायकों वाला यह क्षेत्र उत्तरप्रदेश के कई जिलों की सीमा को छूता है।

भाषा-संस्कृति और राजनीतिक दृष्टि से भी इस इलाके में यूपी का असर दिखाई पड़ता है। कुछ इलाकों में इसी वजह से समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का भी जनाधार है।