भोपाल (सौरभ खंडेलवाल)। लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने वाली युवा स्वाभिमान योजना जोर-शोर से लागू तो हो गई, लेकिन आधी-अधूरी तैयारियों के साथ। हालात यह है कि योजना लागू होने के बाद प्रशिक्षण के लिए युवाओं को उनकी पसंद के ट्रेड में प्रशिक्षण के लिए 20 से 50 किमी दूर जाना पड़ रहा है। इससे निराश कई युवाओं ने ट्रेनिंग लेना बंद कर दिया है।

योजना में करीब 42 हजार युवाओं को ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया है, लेकिन रोजाना उपस्थिति 10 से 19 हजार के बीच ही है। पिछले दिनों योजना की समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आए हैं। योजना के तहत युवाओं को 90 दिन के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाना है, लेकिन कौशल विकास विभाग के पास पर्याप्त सुविधाएं ही मौजूद नहीं है।

विभाग के पास प्रशिक्षण देने के लिए 99 हजार सीट है, इसमें से 32 हजार सीट तो सिर्फ ब्यूटी पार्लर और सिलाई की हैं। कई शहर ऐसे हैं, जहां सिर्फ सिलाई की ट्रेनिंग की सुविधा ही मौजूद हैं। अन्य विषय में ट्रेनिंग की इच्छा रखने वाले इन शहरों के युवाओं ने इसी वजह से ट्रेनिंग लेना शुरू नहीं किया है। 378 नगरीय निकायों में से 212 में प्रशिक्षण केंद्र ही नहीं हैं। नीमच, छतरपुर, कटनी, इंदौर सहित कई शहरों में निजी प्रशिक्षण केंद्रों ने युवाओं की ट्रेनिंग शुरू ही नहीं की है।

70 प्रतिशत उपस्थिति नहीं तो नहीं मिलेगा पैसा

योजना में शामिल होने वाले युवाओं को स्टायपेंड भी तभी मिलेगा, जब ट्रेनिंग और नगरीय निकायों में काम के दौरान उनकी उपस्थिति 70 प्रतिशत या इससे अधिक होगी।

केस- 1

छतरपुर में 60 युवाओं को प्रशिक्षण के लिए 40 किमी दूर कौशल विकास केंद्र आवंटित हुआ है। प्रशिक्षण शुरू ही नहीं हो पाया।

केस- 2

कटनी में रिटेल में प्रशिक्षण के लिए 30 युवाओं को 50 किमी दूर कौशल विकास केंद्र में जाने के लिए कहा जा रहा है।

केस- 3

आगर में सिर्फ सिलाई के लिए ट्रेनिंग सेंटर उपलब्ध हैं। इस कारण युवाओं ने ट्रेनिंग लेना शुरू ही नहीं किया है।

अन्य ट्रेड में डिमांड नहीं

अभी हमारे पास जो सीटें उपलब्ध हैं, उन्हीं में ट्रेनिंग कराएंगे। अन्य ट्रेड में बहुत ज्यादा डिमांड भी नहीं आ रही है- प्रमोद अग्रवाल, प्रमुख सचिव, तकनीकीशिक्षा एवं कौशल विकास विभाग