भोपाल। लोकसभा चुनाव के लिए इस बार भाजपा को प्रदेश की कई सीटों पर प्रत्याशी चयन में भारी असमंजस का सामना करना पड़ा। कांग्रेस जहां अपने सभी 29 उम्मीदवारों का एलान कर चुकी है वहीं 28 सीटें घोषित कर चुकी भाजपा ने इंदौर का मामला होल्ड पर रख दिया है। विचार मंथन का सिलसिला लंबा खिंचता जा रहा है, असमंजस और असंतोष का सिलसिला बरकरार है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि उम्मीदवार की घोषणा में एक-दो दिन और लग सकते हैं। 22 अप्रैल से नामांकन पत्र जमा होना शुरू हो जाएंगे।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (ताई) की पारंपरिक सीट रही इंदौर में इस बार भाजपा संगठन को प्रत्याशी का चयन करना लोहे के चने चबाने जैसा हो गया। बुधवार को शहर में शंकर लालवानी के नाम की अफवाह के साथ ही एकाएक विरोध का सिलसिला भी चल पड़ा।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि टिकट के अन्य दावेदारों के साथ लालवानी की समाज के भी कतिपय लोगों ने आपत्ति जताने में पीछे नहीं रहे। इसके बाद प्रदेश अथवा हाईकमान की ओर से किसी ने भी स्थानीय नेताओं से इस मुद्दे पर कोई संपर्क नहीं किया। प्रत्याशी को लेकर अब प्रदेश और राष्ट्रीय संगठन ही अपनी ओर से अंतिम निर्णय सुनाएगा।

ये रहे संभावित नाम

इंदौर में भाजपा की ओर से पार्टी के छोटे-बड़े कमोवेश सभी नेता अपनी दावेदारी जता चुके हैं। संभावित प्रत्याशी के बतौर कैलाश विजयवर्गीय से लेकर पूर्व महापौर कृष्ण मुरारी मोघे, महापौर मालिनी गौड़, रमेश मेंदोला, ऊषा ठाकुर, शंकर लालवानी, गोपी नीमा, भंवर सिंह शेखावत, उमाशशि शर्मा सहित अंजू व चंद्रकुमार माखीजा के नामों की चर्चा हो चुकी है।

उल्लेखनीय है कि कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं। वे बुधवार को ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे इस दौड़ में नहीं है। गुरुवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता गोविंद मालू भी टिकट के लिए प्रदेश संगठन के सामने अपनी दावेदारी जता चुके हैं। पार्टी यदि किसी पैराशूट प्रत्याशी के नाम पर विचार नहीं कर रही तो वह इन्हीं में से किसी एक के नाम पर दांव लगाएगी।

निर्णय में दो दिन और

इंदौर सहित मालवा-निमाड़ की आठ सीटों पर 22 अप्रैल से नामांकन पत्र जमा होना शुरू हो जाएंगे। मप्र में भाजपा अब तक 28 सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतार चुकी है। बताया जाता है कि ताई ने संगठन को जो नाम सुझाए हैं उनकी जीत की संभावनाओं को लेकर संशय का माहौल है।

ताई का उत्तराधिकारी कौन होगा इसको लेकर अब भी पसोपेश बना हुआ है। यही कारण है कि जल्दी निर्णय नहीं हो पा रहा, इसके अलावा संगठन की यह भी रणनीति है कि अंतिम क्षणों में किसी एक नाम को हरी झंडी देकर असंतोष और संभावित विरोध को कम कर दिया जाए। एक-दो दिन में प्रत्याशी का एलान होने की संभावना जताई गई है।