गणेश स्तुति से लेकर राम राज्याभिषेक तक सिमटा नृत्य में

शहीद भवन में पद्मश्री स्व. गुलवर्धन की स्मृति में आयोजित रंग उत्सव-स्वयं सिद्धा में नाट्य मित्रम ग्रुप द्वारा कुचीपुड़ी बैले एवं नृत्य की प्रस्तुति

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

भारत की प्रसिद्ध नृत्य शैली कुचीपुड़ी दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश की नृत्य शैली है और नृत्य की इसी खूबसूरत शैली से मंगलवार को शहीद भवन रंगारंग हो रहा था। दरअसल, शहीद भवन में आयोजित पद्मश्री स्व. गुलवर्धन की स्मृति में आयोजित रंग उत्सव-स्वयं सिद्धा में नाट्य मित्रम ग्रुप के 8 कलाकारों ने कुचिपुड़ी बैले और नृत्य की प्रस्तुति दी। जिसका आयोजन चैतन्य सोश्यो कल्चरल सोसायटी की ओर से किया गया था। कुचीपुड़ी नृत्य की इस प्रस्तुति का निर्देशन हैदराबाद के डॉ. हिमा बिंदु कनोज ने किया था। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों की शुरूआत भगवान गणेश की स्तुति गजानन्याट्टम से की। राग वैलावाहिनी आदिताल में निबद्ध इस प्रस्तुति ने सभागार को आनंदमय बना दिया। इसके बाद राग महिका आदिताल में निबद्ध स्वागतम कृष्णा में कलाकारों ने वृंदावन में श्रीकृष्ण का स्वागत करते हुए मुद्राएं पेश की। कलाकारों द्वारा रामा रामायानम में रामायण के 108 श्लोकों की प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने राम जन्म से लेकर राम के राज्याभिषेक को एक बेहतरीन नृत्य नाटिका के रूप में प्रदर्शित किया गया।

थाली पर पैरों के सहारे किया नृत्य

रामायण की इस खूबसूरत नाट्य प्रस्तुति के बाद जातिस्वरम पेश कर भी कलाकारों ने खूब तालियां बटोरी। इस नृत्य में ताल पर फोकस किया जाता है जो राग अठाना और आदिताल में निबद्ध रचना थी। प्रस्तुतियों की कड़ी में मीरा वचन में आर्टिस्ट वैष्णवी ने जग में सुंदर है दो नाम... भजन पर खूबसूरत नृत्य पेश किया। प्रस्तुति में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया था। तरंगनम प्रस्तुति में डॉ. हिमा और उनकी शिष्या सुरी श्रीवाली ने पारंपरिक नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। एक थाली पर पैरों के सहारे किया जाने वाला ये नृत्य कुचीपुड़ी की ऑथेंटिक नृत्य शैली है। राग मलिका और आदिताल में निबद्ध व म्यूजिकल बीट्स पर होने वाले इस नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। अंतिम प्रस्तुति तिलान की रही, जो रिदमिक बेस्ड परफॉर्मेंस थी, जिसमें सुर और ताल पर फोकस कर नृत्य किया जाता है। नृत्यांगना डॉ. हिमा बिंदु कनोज ने इस आकर्षक प्रस्तुति से दर्शकों से खूब तालियां बटोरी।