भोपाल। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस में करीब एक साल से विधानसभा चुनाव के दावेदारों को लेकर कई तरह की शर्तों को लगाने की कोशिशें हुई हैं। दावेदारों की संख्या को कम करने के लिए अब तक जितने भी फैसले लिए गए हैं, उन पर नेता ही भारी पड़े हैं। यही वजह रही कि इन सभी फैसलों को वापस लेना पड़ा है।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया ने करीब एक साल पहले मप्र का प्रभार संभालते ही सबसे पहले युवाओं को मौका देने के नाम पर 60 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को विधानसभा चुनाव से दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने ऐसे नेताओं को सलाह दी थी कि वे विधानसभा चुनाव की जगह लोकसभा चुनाव लड़ें। इसी कड़ी में बाबरिया ने चार बार विधानसभा चुनाव जीतने वाले नेताओं को लोकसभा चुनाव लड़ने की बात रखी।

इन फैसले की परिधि में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह, विधायक डॉ. गोविंद सिंह, आरिफ अकील जैसे नेता आए तो हाईकमान तक बात पहुंची। बाबरिया ने फिर इसमें यह जोड़ते हुए शर्त वापस ली कि मैंने तो केवल सुझाव दिया था कि ऐसे नेताओं को विधानसभा चुनाव नहीं लोकसभा चुनाव मैदान में आना चाहिए।

दावेदारों से खजाना भरने का फैसला भी पलटा

फिर बाबरिया ने पीसीसी की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए विधानसभा चुनाव के दावेदारों से आवेदन के साथ राशि लेने का प्रेस कॉन्फ्रेंस में एलान किया था। अनुसूचित जाति-जनजाति व महिलाओं से 25 हजार और सामान्य वर्ग के दावेदारों से आवेदन के साथ 50 हजार रुपए का डिमांड ड्राफ्ट मांगा गया।

सैकड़ों दावेदारों ने आवेदन के साथ राशि जमा भी कर दी। मगर इस पर पीसीसी के नेता सहमत नहीं थे तो उन्होंने इस मुद्दे को भी हाईकमान तक लेकर पहुंचे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद इस शर्त से भी पीसीसी पीछे हटी।

पदाधिकारियों को भी रोकने का प्रयास

विधानसभा चुनाव में प्रदेश कांग्रेस या जिला कांग्रेस के पदाधिकारियों को टिकट देने से रोकने के प्रयास भी नाकाम रहे। पदाधिकारियों को यह कहा गया कि जो चुनाव लड़ना चाहते हैं वे पद छोड़ दें। इससे पीसीसी और जिला कांग्रेस के पदाधिकारियों में हड़कंप मच गया था।

आज यह हालात है कि पीसीसी और आनुषांगिक संगठनों के कई पदाधिकारियों सहित जिला कांग्रेस के अध्यक्ष टिकट पाने के लिए लाइन में लगे हैं। हाल ही में कांग्रेस ने दावेदारों के 15 हजार फेसबुक लाइक्स और पांच हजार टि्वटर फॉलोअर्स की शर्त लगाई थी, जिसे तीन दिन बाद ही वापस ले लिया।