राजीव सोनी, भोपाल। विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होते ही राजनीतिक दलों ने अपनी सियासी गोटियां जमाने की कवायद शुरू कर दी है। बहुजन समाज पार्टी ने कांग्रेस को नाउम्मीद करते हुए सभी 230 सीटों पर ताल ठोकने का एलान किया है।

उसका दावा है कि इस बार विधानसभा में उसकी संख्या सभी दलों को चौंकाएगी। सरकार भले ही किसी की बने लेकिन सत्ता की चाबी बसपा के हाथ ही रहेगी। बसपा सुप्रीमो मायावती ने मध्य प्रदेश में 'हाथी" की ताकत दिखाने के लिए विश्वस्त रामअचल राजभर को प्रभारी बनाकर भेजा है।

प्रदेश में बसपा ने मौजूदा चुनाव में अपने पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्र बुंदेलखंड, विंध्य और ग्वालियर-चंबल से निकलकर महाकोशल और मालवा के आदिवासी अंचलों में भी जनाधार बढ़ाने की मुहिम शुरू की है। प्रदेश प्रभारी ने सूबे के नवनियुक्त अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के साथ इन अंचल में घूमकर संभावित प्रत्याशियों को बूथ, ब्लॉक और जिला मंडलम स्तर पर जमीनी तैयारी के निर्देश दिए हैं।

बसपा का कहना है कि चुनावी घोषणा पत्र और बड़े-बड़े चुनावी वायदों में हमारा भरोसा नहीं। एट्रोसिटी एक्ट, आरक्षण और किसानों की ऋण माफी जैसे मुद्दे पर बात करने के बजाए बसपा स्वयं को

आर्थिक आधार पर आरक्षण का हिमायती बता रही है। मायावती संसद में यह बात कह चुकी हैं।

बसपा के दावे-वादों पर मप्र प्रभारी राजभर से बातचीत

ऐसा क्या हुआ कि कांग्रेस के साथ बहुप्रचारित गठबंधन फेल हो गया, क्या वाकई कोई दबाव था?

हम लोग तो पहले दिन से ही गठबंधन से इंकार कर रहे थे, कांग्रेस ही एकतरफा लोगों को भ्रमित कर रही थी। बसपा किसी के दबाव में आकर निर्णय नहीं करती।

राहुल गांधी ने घोषणा की है कि सरकार बनने पर दस दिन में किसानों के ऋण माफ कर देंगे, इस मुद्दे और घोषणा पत्र को लेकर बसपा की क्या योजना है?

कांग्रेस ने वर्षों तक राज किया तब ऐसा क्यों नहीं किया, भाजपा-कांग्रेस के वायदों से हमें मतलब नहीं। बसपा तो काम में भरोसा रखती है, हम घोषणा पत्र जारी नहीं करते। किसानों को उचित मूल्य मिलेगा, जंगल और भूमि से दबंगों का कब्जा खत्म होगा और अपराधी जेल में दिखेंगे।

2013 में बसपा को 21 लाख 23 हजार वोट(6.29प्रतिशत) और 4 सीटें मिली थीं, ऐसे में सरकार बनाने के सपने हवा-हवाई तो नहीं?

हां,यह सही है कि हमारे 4 विधायक जीते लेकिन 11 सीटों पर दूसरे और 18 पर तीसरे क्रम पर बसपा ही थी। इस बार हम ये सीटें जीतेंगे, भले बहुमत न मिले लेकिन सत्ता की चाबी इस बार बसपा के हाथ में ही रहेगी।

चुनाव में क्या आरक्षित वर्ग पर ही फोकस रहेगा?

ऐसा बिल्कुल नहीं है, बसपा सर्वजन हिताय की बात करती है। हम बड़ी संख्या में सवर्ण प्रत्याशी भी मैदान में उतारेंगे। उप्र में 4 बार हमारी सरकार रही इस दौरान वहां कानून के राज और विकास पर जोर रहा। कभी दंगा-फसाद नहीं हुआ।

इस बार भाजपा के साथ अब कांग्रेस के नेता भी चुनाव में सॉफ्ट हिंदुत्व पर जोर दे रहे हैं, बसपा की क्या रणनीति है?

हमारा मत बिल्कुल स्पष्ट है, मायावती जब उप्र की मुख्यमंत्री थीं तब राममंदिर के मुद्दे पर उन्होंने कोर्ट के निर्णय को महत्व देने की बात कही थी। आज भी हम उस पर कायम हैं।

फिर चुनाव के मुद्दे क्या रहेंगे लोग आपको वोट क्यों दें?

हम मतदाताओं को बताएंगे कि किसान, युवा, गरीबों और महिलाओं के हित सुरक्षित रहेंगे। रोटी, कपड़ा और मकान के साथ सुरक्षा का माहौल देंगे। विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे घोटालेबाजों की असलियत और नोटबंदी व जीएसटी से हुई तबाही भी हाइलाइट करेंगे।