भोपाल (स्टेट ब्यूरो)। मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले ही सियासत गरमा गई हैं। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग करते ही कांग्रेस बचाव की मुद्रा में आ गई है। भार्गव की चिट्ठी भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है जिसके तहत कमलनाथ सरकार को अस्थिर दिखाने का माहौल तैयार हो सके। माना जा रहा है कि विधानसभा सत्र के माध्यम से भाजपा सरकार को बहुमत साबित करने के पेंच में उलझाना चाहती है। गोपाल भार्गव की चिठ्ठी सामने आते ही कांग्रेस ने भी मैदान संभाला और कहा कि हम सदन में कई बार पहले ही बहुमत साबित कर चुके हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि भाजपा पहले दिन से यही सब कर रही है, अगर वो फिर यही चाह रही तो हम तैयार हैं, हमें कोई दिक्कत नहीं है।

सोमवार को भार्गव ने पत्र भेजकर राज्यपाल से आग्रह किया कि वे विशेषाधिकार का उपयोग कर शीघ्र ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के निर्देश मुख्यमंत्री कमलनाथ को दें। उन्होंने पत्र में कहा कि नई सरकार का गठन हुए छह माह बीत चुके हैं। इस दौरान कई जनहित की समस्याओं और मुद्दों से जनता जूझ रही है। इन मुद्दों पर विधानसभा में चर्चा होना जरूरी है। सरकार ने गठन के बाद मात्र दो दिन का सत्र 18 फरवरी को बुलाया था, जिसमें लोकहित के मुद्दों पर बहस नहीं हो पाई थी।

पत्र में कहा, जनहित के मुद्दों पर चर्चा जरूरी

नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल से कहा है कि राज्य के कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर तत्काल चर्चा की जानी चाहिए, ऐसी स्थिति में विशेष सत्र बुलाना उचित होगा। प्रदेश में कई ज्वलंत समस्याएं हैं। पेयजल संकट गंभीर हो गया है। कानून व्यवस्था की स्थिति खराब होती जा रही है। किसानों से गेहूं एवं चने की फसलों का उपार्जन तथा भुगतान नहीं हो पा रहा है। प्रदेश में कर्जमाफी के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है और किसान भ्रमित हैं। प्रदेश सरकार ने संबल एवं अन्य लोकप्रिय योजनाओं पर रोक लगा रखी है, जिसके चलते प्रदेश के लोगों को उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने लिखा है कि फरवरी में दो दिन का लघु सत्र बुलाया गया था, लेकिन उसमें इन विषयों पर चर्चा नहीं हो सकी थी। उन्होंने आग्रह किया है कि लोक महत्व के इन विषयों की तात्कालिकता को देखते हुए विशेष सत्र के लिए मुख्यमंत्री को निर्देशित करें। सत्र बुलाने की मांग में जल्दबाजी के सवाल पर भार्गव ने कहा कि यदि लोकसभा चुनाव के परिणाम कांग्रेस के प्रतिकूल आते हैं तों हम सभी का कर्तव्य है कि समय रहते उसका परीक्षण कराया जाए।

विधानसभा का सियासी सीन

मप्र विधानसभा की सदस्य संख्या कुल 230 है। यह पहला मौका है जब कांग्रेस और भाजपा दोनों बहुमत के जादुई आंकड़े को छू नहीं पाई थी। बहुमत के लिए 116 विधायकों की आवश्यकता होती है, जबकि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 114 और भाजपा 109 पर आकर अटक गई। इसके बावजूद कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका इसलिए मिल गया, क्योंकि उसके पास 4 निर्दलीय, 2 बसपा और एक सपा विधायक का समर्थन है। कांग्रेस की यह भी खुशकिस्मती रही कि चारों निर्दलीय विधायक उसके अपने थे। यानी कांग्रेस से टिकट न मिलने के कारण बगावत कर चुनाव लड़े थे, इसलिए किसी को भी सरकार का समर्थन करने के लिए मनाने में उसे दिक्कत नहीं हुई। इन चार में से एक को तो मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंत्री बनाया। शेष तीन अभी भी भरोसे बैठे हैं। भरोसे में तो बसपा और सपा के विधायक भी हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की दिक्कत यह है कि वे कितनों को समायोजित कर पाएंगे।

किसके पास कितने विधायक

कांग्रेस - 114

भाजपा - 109

बसपा - 2

सपा - 1

निर्दलीय - 4

(कांग्रेस मध्यप्रदेश में बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर सरकार चला रही है।)

सरकार बहुमत साबित करने को तैयार - कमलनाथ

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि सरकार बहुमत साबित करने को तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बनने के पहले दिन से ही भाजपा परेशान है, जबकि 5 महीने में 4 बार बहुमत साबित किया जा चुका है। अगर भाजपा फिर से फ्लोर टेस्ट कराना चाहती है तो उसके लिए भी तैयार हैं। वे सरकार को परेशानी में डालने की कोशिश कर लें, बहुमत साबित कर फिर उनके इरादों का पर्दाफाश करेंगे।

4 बार साबित किया बहुमत

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के लोकसभा चुनाव प्रबंधन प्रभारी सुरेश पचौरी ने कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत फ्लोर टेस्ट (मत विभाजन) कराया जाए तो कांग्रेस तैयार है। इसके पहले भी प्रदेश सरकार विस अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव सहित चार बार अपना बहुमत साबित कर चुकी है।

यह पहली बार नहीं है जब भाजपा ने कमलनाथ सरकार पर ऐसा निशाना साधा हो। रविवार को इंदौर में वोट देने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने भी यह कहा था कि 22 सीटों का सपना देखने वाले कमलनाथ 22 दिन तक सीएम रहेंगे भी या नहीं इस बात पर प्रश्नचिन्ह है।

मंत्री जीतू पटवारी ने किया ट्वीट

मध्यप्रदेश के मंत्री जीतू पटवारी ने भाजपा के विधानसभा सत्र की मांग पर ट्वीट कर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि मप्र सरकार के फ्लोर टेस्ट की मांग रहे है गोपाल भार्गव जी को विधानसभा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव में मुंह की खानी पड़ी है। अब भार्गव जी को मंत्री रहते हुए पंचायती विकास मंत्रालय में किए गए 'कारनामों की जांच' का डर सता रहा है। यह कमलनाथ जी की सरकार है, जहां भाजपा की सोच खत्म होती है, वहाँ से कमलनाथ जी की सोच शुरू होती है। भार्गव जी, आप कितने भी फ्लोर टेस्ट करवा लो आप आपके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार से बच नहीं सकते। एग्जिट पोल की 'जुमलेबाज़ी' से मध्यप्रदेश के एक 'जुमलेबाज' भरी 'दोपहरी' में 'मस्त' हो गए और कर दी विशेष सत्र की मांग। विधानसभा चुनाव में 'कमल' की दुर्गति के सदमें में वे पूरे ‘5 साल' नहीं उबर पाएंगे।