वैभव श्रीधर, भोपाल। प्रदेश में तबादलों पर प्रतिबंध होने के बावजूद हर संवर्ग में इन दिनों धड़ल्ले से स्थानांतरण हो रहे हैं। भाजपा इसको लेकर कांग्रेस पर तबादला उद्योग खोलने का आरोप लगा रही है तो मुख्यमंत्री कमलनाथ इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं।

तबादलों से जुड़ा एक तथ्य यह भी है कि आईएएस और आईपीएस अफसरों में कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें सरकार बदलने या किसी फार्मूले से कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसमें प्रमुख सचिव स्तर के अफसर डॉ. राजेश राजौरा, मोहम्मद सुलेमान, जेएन कंसोटिया, हरिरंजन राव सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं तो आईपीएस अफसरों की फेहरिस्त भी लंबी है। इसमें अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पवन जैन, संजीव शमी और शैलेंद्र श्रीवास्तव के नाम प्रमुख हैं।

सामान्य तौर पर सरकार किसी भी अधिकारी को दो-तीन साल से ज्यादा समय एक स्थान पर नहीं रखती है। मैदानी पदस्थापना के साथ मुख्यालय में भी यही फार्मूला लागू होता है, लेकिन कुछ अधिकारी इसके अपवाद हैं। प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश कुमार राजौरा शिवराज सरकार में भी कृषि विभाग का जिम्मा संभाल रहे थे और कमलनाथ सरकार में भी।

वे सितंबर 2013 से लगातार इस पद पर हैं। इसी तरह मोहम्मद सुलेमान उद्योग विभाग में लंबे समय से हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग में जेएन कंसोटिया अगस्त 2014 से प्रमुख सचिव हैं। हरिरंजन राव भी पर्यटन विभाग से किसी ने किसी रूप में लंबे समय से जुड़े हुए हैं।

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा में मनु श्रीवास्तव अप्रैल 2015 से हैं। उन्हें वाणिज्यिक कर विभाग की नई जिम्मेदारी तो दी गई है पर पुराने विभाग से छेड़छाड़ नहीं की गई। हाल ही में कमिश्नर बनाए गए आकाश त्रिपाठी इंदौर में लंबे समय से जमे हैें। वे यहां नगर निगम कमिश्नर और कलेक्टर रहे और अब कमिश्नर बनाए गए हैं।

इसके पहले विद्युत वितरण कंपनी का काम देख रहे थे। सामान्य प्रशासन विभाग में रश्मि अरुण शमी भी काफी समय से पदस्थ हैं। वे यहां सचिव थीं और अब प्रमुख सचिव बन गई हैं। सरकार बदलने से सिर्फ इतना परिवर्तन हुआ कि उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग का प्रमुख सचिव बना दिया और सामान्य प्रशासन का काम अतिरिक्त तौर पर दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने इतने तबादले किए पर जल संसाधन विभाग की कमान अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया के पास ही रही। अब जब वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं तो अपर मुख्य सचिव जनसंपर्क एम. गोपाल रेड्डी को विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

चार-पांच साल बहुत होते हैं: बुच

पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच का कहना है कि चार-पांच साल बहुत होते हैं। एक जगह ज्यादा समय तक अधिकारी को रखने से दिक्कत होती है, लेकिन जल्दी-जल्दी बदलाव भी नहीं होना चाहिए। इसका असर कामकाज पर पड़ता है। यदि किसी अधिकारी को एक जगह पर लंबे समय तक रखा जा रहा है तो इसकी वजह भी साफ होनी चाहिए।

सामान्यत: तबादला नीति बनाकर ही होने चाहिए और ज्यादा स्थानांतरण भी ठीक नहीं होते हैं। यह क्रम सालभर नहीं चलना चाहिए। नई सरकार आती है तो वो अपने हिसाब से कुछ अधिकारियों को हटाती और पदस्थ करती है। इसमें कोई बुराई नहीं है पर सोच-विचार कर ही तबादला करना चाहिए वरनासंशोधन करना पड़ता है, जिस पर सवाल भी उठते हैं।

पांच अफसर नहीं पूरे तंत्र से सरकार चलवाते हैं कमलनाथ: कांग्रेस

सरकार के प्रवक्ता तरुण भनोत और जीतू पटवारी का कहना है कि प्रदेश में कहीं भी अराजकता की स्थिति नहीं है। सरकार और व्यवस्था बदली है। पहले पांच अधिकारी सरकार चलाते थे। मुख्यमंत्री कमलनाथ पूरे तंत्र को इस काम में लगाना चाहते हैं। प्रदेश के सभी अधिकारी-कर्मचारी योग्य हैं लेकिन सबकी अलग-अलग क्षमताएं हैं।

इसके हिसाब से ही उनकी सेवाएं जहां जरूरी है वहां ली जा रही है। हमसे किसी भी अधिकारी-कर्मचारी ने शिकायत नहीं की है। वैसे भी किसका कहां उपयोग करना है, यह सरकार का अधिकार क्षेत्र है। जहां तक बात पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आरोपों की हैं तो उन्हें इस मामले में कुछ भी कहने का नैतिक अधिकार नहीं है क्योंकि उनके कार्यकाल में चाहे जब प्रशासनिक सर्जरी होती थीं।