भोपाल (स्टेट ब्यूरो)। मप्र पुलिस मुख्यालय में पदस्थ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) डॉ. राजेंद्र मिश्रा के पिता कुलामणि मिश्रा के जीवन से जुड़ी गुत्थी 59 दिन बाद भी नहीं सुलझ पाई। इस बीच एडीजी मिश्रा की मां शशिमणि मिश्रा ने मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष को दूसरा आवेदन सौंपकर मांग कर दी है कि पूर्व में सौंपा

उनका शिकायती आवेदन राज्यपाल को भेजा जाए। आवेदन में उन्होंने मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष पर निजता

व मौलिक अधिकार हनन के आरोप लगाए हैं। यह भी कहा है कि आयोग के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस गुलाब गुप्ता भी ऐसी शिकायत राज्यपाल को प्रेषित करने की राय दे चुके हैं।

एडीजी मिश्रा की मां ने आयोग के कार्यालय में बुधवार को अपना दूसरा आवेदन सौंपा। उन्होंने कहा है कि आयोग

के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस गुप्ता के बयान से वह सहमत हैं और अपेक्षा करती हूं कि आयोग के मौजूदा अध्यक्ष भी एक

परिपक्व न्यायाधीश एवं पूर्व अध्यक्ष के कथन से पूर्णत: सहमत होंगे। अत: मेरा मामला व शिकायत राज्यपाल को प्रेषित कर दें, मेरे नागरिक अधिकारों के संरक्षण की परिधि में निर्णय कर सार्वजनिक जीवन में एक उदाहरण प्रस्तुत करें। उल्लेखनीय है कि आयोग एडीजी मिश्रा की मां के द्वारा पूर्व में दिया गया आवेदन नस्तीबद्ध कर चुका है।

अधिकारी ने उठाए सवाल

भोपाल के उपसंचालक अभियोजन ने पुलिस अधीक्षक भोपाल को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। इसमें कुछ सवाल उठाए गए हैं। कहा गया है कि प्रेषित दस्तावेजों से स्पष्ट नहीं होता कि आयोग द्वारा स्वयं संज्ञान लिया गया है अथवा किसी की शिकायत करने पर संज्ञान लिया। आयोग द्वारा अधिनियम की धारा 13(3) के तथा धारा 100 दंडप्रक्रिया संहिता की शक्तियों के लिए यह स्पष्ट नहीं किया गया कि एडीजी मिश्रा के घर में रखे किन दस्तावेजों को अभिग्रहित करना है अथवा उनकी प्रतिलिपियां लेना है।

परिजन बोले- चल रही नाड़ी व सांस

एडीजी मिश्रा के परिजनों का कहना है कि उनके पिता कुलामणि मिश्रा की सांस और नाड़ी अब भी चल रही है। उनकी जीभ ज्यों की त्यों है, आयुर्वेद और वैदिक पद्धति से इलाज चल रहा है। उन्हें शहद के साथ जड़ी-बूटियां दी जा रही हैं, जो नाड़ी वैद्य उनका इलाज कर रहे हैं, उन्हें 50 साल का अनुभव है और प्रदेश के कई ख्यातिनाम लोगों का इलाज कर चुके है। एडीजी मिश्रा की मां और अन्य परिजनों की आपत्ति है कि आयोग कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर उनके निजी मामले में दखल क्यों दे रहा है।