- मानव संग्रहालय में मैसूर चित्रकला प्रदर्शनी शुरू

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

मानव संग्रहालय में मैसूर चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसमें मैसूर की खास पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई है। सभी चित्र 11 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान तैयार किए गए हैं, जिमसें देवी देवताओं के साथ धर्म ग्रंथों की कहानियों को प्रमुख स्थान दिया गया। 17 जुलाई तक चलने वाली प्रदर्शनी में 50 कलाकारों के 52 चित्र प्रदर्शित किए गए।

मैसूर चित्रकला दक्षिण भारत के मैसूर शहर में विकसित एक स्थापित कला रूप है। यह अपने पारंपरिक ब्रश और सौंदर्य रंगों के कारण बेशकीमती चित्रकला में शुमार है। मैसूर चित्रकला विश्व में दक्षिण भारतीय चित्रकला के शास्त्रीय रूप से उत्पन्न सौंदर्य के प्रतीक माने जाते हैं। मैसूर चित्रों को उनकी शैली एवं रंगों की विशेषता के लिए पहचाना जाता है। इस चित्रकला में कागज के कैनवास पर बहुत बारीकी और पतले सोने की पत्तियों का उपयोग कर चित्रों को तैयार किया जाता है, इसलिए इस चित्रकला में बहुत अधिक मेहनत की आवश्यकता होती है।

सोने के रंग का होता है उपयोग

मैसूर पेंटिंग की रचना करते समय लकड़ी के चौकोर बोर्ड पर कागज या कपड़े को कॉपर सल्फेट से चिपकाने वाले पदार्थ से चिपका देते हैं। इसके बाद इस शीट पर छवि का एक प्रारंभिक स्केच बनाते हैं। स्केच में कई जगह आकृति को उभरने के लिए उसमें गोंद और मैग्नीशियम ऑक्साइड को मिलाकर लगते हैं, जिससे आकृृति उभरी हुई दिखाई देती है। चित्र में जरूरत के हिसाब से हरा, काला, भूरा, लाल, नीला रंगों का उपयोग किया जाता है। साथ ही मैसूर चित्रकला में उभार वाले स्थान पर रंग संयोजन के लिए सोने के रंग एवं पत्तियों का उपयोग बहुत महीन रेखाओं के रूप में किया जाता है। एक्सपर्ट चंद्रिका कहती हैं मैसूर चित्रों के विषय हिंदू देवी-देवताओं और हिंदू मिथकों के दृश्य होते हैं।