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    अब 19 नए स्थानों से भी होगी नर्मदा जल की जांच

    Published: Sat, 13 Jan 2018 08:19 PM (IST) | Updated: Sun, 14 Jan 2018 12:53 PM (IST)
    By: Editorial Team
    narmada river 13 01 2018

    हरिचरण यादव, भोपाल। गुजरात में नर्मदा नदी के पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) ने नदी के पानी की जांच का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब नर्मदा नदी के पानी की शुद्धता देखने के लिए 19 नए स्थानों से सैम्पल लेकर जांच की जाएगी। नए स्थानों से लिए गए सैम्पल की जांच रिपोर्ट फरवरी 2018 में आनी शुरू हो जाएगी।

    अभी मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से लेकर ककराना (मप्र की सीमा का एक डूब प्रभावित गांव) तक 31 स्थानों से नदी के पानी की सैम्पलिंग करता है। इसकी जांच पीसीबी की क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं में होती है। इस रिपोर्ट के अनुसार सभी जगह पानी ए-केटेगिरी का है, लेकिन दिसंबर 2017 में अहमदाबाद के कार्तिक कुमार भट्ट ने इस रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाकर नर्मदा के पानी को खराब बताया है। यानी यह पानी पीने के उपयोग में नहीं लिया जा सकता।

    याचिका पर कोर्ट ने गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्र सरकार को तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को होनी है। इधर, गुजरात में नर्मदा के पानी की गुणवत्ता पर उठे सवाल के बाद से मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हरकत में आ गया है। आनन-फानन में सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को पत्र लिखे और अमरकंटक से ककराना तक अपने-अपने क्षेत्रों में नर्मदा किनारे नए सैम्पलिंग स्थान (जहां से लिए गए पानी की जांच की जानी है) चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। कुछ क्षेत्रीय अधिकारियों ने ये स्थान चिन्हित कर लिए हैं जबकि कुछ जगह स्थान चिन्हित करना बाकी है। जनवरी के आखिरी सप्ताह में ही इन स्थानों से लिए गए पानी के सैम्पल की जांच शुरू हो जाएगी।

    याचिका में ये दी हैं दलीलें

    याचिका में कहा गया है कि नर्मदा नदी 14 जिलों व 11 बड़े शहरों से होकर करीब 1300 किमी क्षेत्र में बहती है। इनमें से अधिकांश शहरों से निकलने वाला खराब पानी बिना ट्रीट किए नर्मदा में छोड़ा जा रहा है इसके कारण पानी दूषित हो रहा है। इससे गुजरात में जानमाल को नुकसान पहुंच सकता है।

    मप्र पीसीबी की रिपोर्ट, ए-केटेगिरी का है पानी

    इधर मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की साल 2017 की रिपोर्ट (जुलाई-अगस्त को छोड़कर) के मुताबिक सभी 31 स्थानों पर पानी की क्वालिटी ए-केटेगिरी की है। यानी पानी को बिना ट्रीट किए पीने के उपयोग में ले सकते हैं।

    19 नए स्थानों पर करेंगे जांच

    19 नए स्थानों पर नर्मदा के पानी की जांच करेंगे। इसकी कार्रवाई शुरू कर दी है। फरवरी में जांच रिपोर्ट आनी शुरू हो जाएगी - एए मिश्रा, सदस्य सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मप्र

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