भोपाल। प्रदेश के 4.76 लाख पेंशनरों का चार प्रतिशत महंगाई भत्ता जल्द ही बढ़ाया जाएगा। इसके लिए वित्त विभाग ने चुनाव आयोग से अनुमति लेने मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली स्क्रीनिंग कमेटी को प्रस्ताव भेज दिया है। वहीं, छत्तीसगढ़ सरकार को दो फीसदी महंंगाई भत्ता बढ़ाने के लिए सहमति भी दे दी है। संभावना जताई जा रही है कि प्रक्रियात्मक मामला होने की वजह से चुनाव आयोग से अनुमति मिल सकती है।

प्रदेश के नियमित और स्थायी कर्मचारियों के साथ पेंशनर्स का चार प्रतिशत महंगाई भत्ता लंबित हो गया था। जनवरी और जुलाई 2018 में केंद्र सरकार ने सातवें वेतनमान में दो-दो प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाया है। प्रदेश में भी इसका लाभ दिया जाना था पर कोई निर्णय नहीं हो पाया। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार ने कर्मचारियों का महंगाई भत्ता तो बढ़ा दिया पर पेंशनर्स के मामले की गेंद छत्तीसगढ़ के पाले में डाल दी।

दरअसल, राज्य बंटवारा कानून में पेंशनर्स का डीए बढ़ाने के लिए दोनों राज्यों के बीच सहमति होना जरूरी है। छत्तीसगढ़ में पेंशनर्स ने सरकार पर दबाव बनाया। मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री तरुण भनोत ने सहमति देने का पत्र लिखा तो आठ मार्च को छत्तीसगढ़ के वित्त विभाग ने दो प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाए जाने के आदेश जारी कर दिए। इसके साथ ही डीए में दो प्रतिशत की और वृद्धि के लिए मध्यप्रदेश सरकार से सहमति मांग ली।

सूत्रों के मुताबिक वित्त विभाग ने बिना समय लगाए डीए में वृद्धि के लिए सहमति पत्र भेज दिया। वहीं, आचार संहिता के मद्देनजर डीए में वृद्धि के लिए चुनाव आयोग प्रस्ताव भेजने से पहले मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली स्क्रीनिंग कमेटी को भेज दिया।

बताया जा रहा है कि प्रक्रिया से जुड़ा मामला होने की वजह से स्क्रीनिंग कमेटी चुनाव आयोग को प्रस्ताव भेजेगी और संभवत: अनुमति भी मिल जाएगी। उधर, पेंशनर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गणेशदत्त जोशी ने मुख्य सचिव सुधिरंजन मोहंती को ई-मेल के जरिए डीए बढ़ाए जाने का पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने अब तक फैसला नहीं होने से पेंशनर्स में नाराजगी की बात भी रखी।

कैबिनेट में नहीं रखना होगा प्रस्ताव

वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पेंशनर्स का महंगाई भत्ता बढ़ाने के लिए प्रस्ताव कैबिनेट में रखने की जरूरत नहीं है। जब कैबिनेट ने राज्य के नियमित और स्थायी कर्मियों का महंगाई भत्ता चार फीसदी बढ़ाने का निर्णय लिया था, तब पेंशनर्स के मामले में भी सैद्धांतिक सहमति हो गई थी।