- बोट क्लब से शुरू हुई एलजीबीटी परेड, 500 से ज्यादा मेंबर्स हुए शामिल

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

रविवार का दिन शहर के लिए अधिकारों के पक्ष को देखते हुए कुछ खास रहा। जहां एक विशेष समूह ने अपने आप को अधिकार और सम्मान के साथ रिप्रजेंट किया। दरअसल मेट्रो सिटी की तर्ज पर एलजीबीटी मेंबर्स ने प्राइड परेड निकाली, जिसमें लगभग 500 मेंबर्स शामिल हुए। यह शहर में तीसरा मौका है जब ऐसी परेड का आयोजन किया गया है, जिसमें लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर यानी एलजीबीटी कम्युनिटी शामिल हुई। इस दौरान सदस्य इंद्रधनुषी रंग में लिपटे दिखाई दिए। बोट क्लब से शुरू हुई परेड का मकसद इन लोगों को शर्म और डर के साए बाहर करना है। इसमें कई सपोर्टर्स भी शामिल हुए। इंद्रधनुषी रंगों से रंगा यह फ्लैग अब एलजीबीटी का सिंबल बन चुका है। परेड में देश के अलग-अलग शहरों से लोग भोपाल पहुंचे। इससे पहले भोपाल में एलजीबीटी परेड साल 2011 और 2017 में निकाली गई थी।

हम भी सम्मान और हक के अधिकारी

आरीन रत्नेश सोराठिया ने बताया कि इस परेड का उद्देश्य यह बताना है कि एलजीबीटी कम्यूनिटी से जुड़े लोग भी सामान्य जीवन जीने के हकदार हैं। हमारी मांग है कि एलजीबीटी कम्यूनिटी के लोगों को भी समाज में वहीं सम्मान और हक मिलना चाहिए जो सामान्य लोगों को मिलते हैं। परेड के माध्यम से हमने लोगों को जागरूक करना करने का प्रयास किया। एलजीबीटी कम्यूनिटी के लोग भी दूसरों की तरह सामान्य जीवन जीने का हक रखते हैं। ऐसे लोगों से भेदभाव न करें। उन्होंने बताया कि पैरेंट्स अपने बच्चों की बात सुनें और उन्हें समझें। समाज और लोगों के डर से अकसर पैरेंट्स अपने बच्चों की भावनाओं और बदलाव को समझे बिना ही अपना निर्णय उन पर थोप देते हैं, जिसके परिणाम सकारात्मक नहीं होते। कई बार ऐसे लोगों को घर से ही निकाल दिया जाता है। भारत में पहली बार इसका आयोजन कोलकाता में हुआ था। इसके बाद मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली में भी प्राइड परेड ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इस गे-परेड में इन्हें सपोर्ट करने वाली संस्थाएं और वालिटिंयर्स भी पहुंचे।

क्या है प्राइड परेड

यह समलैंगिकों की प्राइड वॉक है। खुद की आइडेंटिटी पर गर्व करने के लिए इसका आयोजन किया जाता है। समान अधिकारों की मांग की जाती है। इन्हें भी समाज में बराबर का दर्जा मिले इसकी मांग की जाती है। हालांकि प्राइड परेड एक प्रदर्शन न होकर एक उत्सव होता है। इसमें हिस्सा लेने वाले मानते हैं कि परेड में शामिल होने वाले गे लोगों को मुंह न छिपाना पड़े और वे सिर उठाकर समाज का हिस्सा बन सकें। प्राइड परेड को अनेक नामों से पुकारा जाता है। कहीं गे प्राइड, प्राइड वॉक, प्राइड मार्च, गे परेड, गे वाक, समलैंगिक और ट्रांसजेंडरों का जुलूस भी कहा जाता है।

शहर संस्थाएं कर रही काम

प्राइड परेड का आयोजन कई संस्थाएं मिलकर भोपाल में कर रही हैं। इस संस्था की एक अधिकारी ने बताया कि इंडिया का दिल होने कारण यह महत्वपूर्ण शहर है। प्रदेश के समलैंगिकों को कोई राइट्स नहीं मिल रहे हैं। यहां भी जो लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर हैं उन्हें समाज में अलग निगाह से देखा जाता है। इसलिए वे घर में ही दबे रह जाते हैं। इनके बारे में कोई बात नहीं की जाती है। ऐसे लोगों की शादी नहीं हो पाती है। भोपाल समेत मध्यप्रदेश के कई जिलों में इस प्रकार के लोग हैं, जो खुलकर समाज के सामने नहीं आ पाते।