भोपाल। भारत भवन में शनिवार की शाम 'ध्रुपद' के नाम रही। सुहावने मौसम में ध्रुपद गायकी से कलाकारों ने ऐसी मिठास घोली जो श्रोताओं को लंबे समय तक याद रहेगी। एक ओर जहां ध्रुपद संस्थान के स्टूडेंट्स मनीष कुमार और संजीव झा की ध्रुपद जुगलबंदी ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। वहीं उदय भवालकर ने एकल ध्रुपद प्रस्तुति से श्रोताओं तक ध्रुपद के नए आयाम पहुंचाए। गायन पर्व-7 के तहत आयोजित इस संगीत संध्या का संचालन कला समीक्षक विनय उपाध्याय ने किया।

सायंकालीन राग यमन से शुरुआत

संगीत संध्या का आयोजन दो सत्रों में किया गया। इसके पहले सत्र में ध्रुपद जुगलबंदी हुई, जिसमें युवा संगीत साधक संजीव झा और मनीष कुमार ने अपनी गायकी से समां बांधा। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत पारंपरिक आलाप, जोड़ और झाला के साथ की। इसके बाद उन्होंने सायंकालीन राग यमन का चयन किया। इसमें चौताल में बंदिश 'प्रथम शरीर ज्ञान नाद भेद तीन स्थान..' की प्रस्तुति दी। इसी राग में उन्होंने सूल ताल में बंदिश 'सूरत मन भाए सुंदर सलोनी..,' पेश की। प्रस्तुति में पखावज पर ज्ञानेश्वर देशमुख, तानपुरे पर रिजिना और साजन शंकरण ने संगत दी।