भोपाल। गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) भोपाल समेत प्रदेश के तीन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पल्मोनरी मेडिसिन (टीबी एवं चेस्ट) में पीजी डिग्री कोर्स शुरू होगा।

जीएमसी व जबलपुर मेडिकल कॉलेज में दो-दो और इंदौर मेडिकल कॉलेज में एक सीट पर दाखिले के लिए मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) ने मान्यता दी है। इन सीटों पर आगामी सत्र (2019-20) से दाखिले होंगे। कोर्स शुरू होने के बाद प्रदेश को हर साल पांच टीबी एवं चेस्ट रोग विशेषज्ञ मिलेंगे। इसका फायदा यह होगा कि छोटे जिलों और टीबी अस्पतालों में इस विषय के विशेषज्ञ हो जाएंगे।

अभी तक प्रदेश के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में टीबी एवं चेस्ट में पीजी डिग्री कोर्स नहीं हो रहा था। इंदौर के सरकारी मेडिकल कॉलेज डिप्लोमा की सीटें थीं। पीजी डिग्री कोर्स शुरू होने से अस्पतालों में भर्ती मरीजों को फायदा मिलेगा। रिसर्च का काम बढ़ेगा।

साथ ही इस विषय में कॉलेजों के लिए फैकल्टी भी मिल सकेंगे। प्रदेश सरकार टीबी अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों के अधीन लाने की तैयारी कर रही है। इसका फायदा मरीजों को तो मिलेगा ही पीजी डिग्री की सीटें बढ़ जाएंगी। साथ ही नए कॉलेजों में पीजी शुरू हो सकेगी।

प्र्रदेश में पीजी डिग्री वाले सिर्फ 30 विशेषज्ञ

प्रदेश में टीबी एवं चेस्ट में पीजी कोर्स नहीं होने की वजह से विशेषज्ञों की कमी है। पीजी डिग्री होल्डर सिर्फ 30 विशेषज्ञ ही हैं। पीजी डिप्लोमा वाले विशेषज्ञ करीब 90 हैं। कम संख्या की वजह से जिला अस्पतालों में इसके विशेषज्ञ नहीं हैं, जबकि स्वाइन फ्लू की बीमारी आने के बाद हर जिला अस्पताल में कम से कम एक विशेषज्ञ होना जरूरी है। बता दें कि डिग्री कोर्स 3 साल व डिप्लोमा कोर्स दो साल का होता है। डिप्लोमा वाले कॉलेज में फैकल्टी नहीं बन सकते।

इन कोर्सों में बढ़ सकती हैं सीटें

जीएमसी में माइक्रोबायोलॉजी व मनोचिकित्सा में पीजी डिग्र्री कोर्स की दो-दो सीटें पहली बार शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए एमसीआई ने फाइनल निरीक्षण कर लिया है। इसके अलावा शिशु रोग, एनेस्थीसिया में आगामी सत्र से सीटें बढ़ने की उम्मीद है। बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी में सुपर स्पेशलिटी कोर्स (एमसीएच) की दो सीटों की मान्यता भी एमसीआई से मिल सकती है।