भोपाल। भोपाल को हेरिटेज और आर्ट के क्षेत्र में यूनाइटेड नेशंस एजुकेशन साइंटिफिक एंड कल्चरल आर्गनाइजेशन (यूनेस्को) की सूची में शामिल करने की कवायद चालू हो गई है। इससे भोपाल शहर विश्व पटल पर आ जाएगा। शुक्रवार को निगम आयुक्त विजय दत्ता दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में यूनिस्को प्रतिनिधियों के समक्ष भोपाल शहर के हेरिटेज और कला रंगमंच के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। आयुक्त ने बताया कि ऐतिहासिक इमारत सदर मंजिल और इसके आसपास की इमारतों व दरवाजों को संरक्षण का काम किया जा रहा है। मोती मस्जिद से लेकर बाबे सिकंदर दरवाजे तक सभी में रेस्टोरेशन किया जाना है।

दत्ता ने बताया कि जनवरी में भोपाल में पहली बार साहित्य और कला से संबंधित कार्यक्रम हुआ था। साथ ही भारत भवन में रंगमंच के आयोजन लगातार किए जाते हैं। इसके अलावा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी ऐतिहासिक गेटों के संरक्षण की योजना है। दत्ता ने बताया कि 6 सप्ताह में आर्ट और हेरिटेज को लेकर किए जा रहे कामों का प्रस्ताव मांगा गया है।

बताया जा रहा है कि यूनिस्को की सूची में वाराणासी, चेन्नई और जयपुर पहले से ही चयनित है। इन शहरों को म्यूजिक और धार्मिक स्थलों के रूप में जाना जाता है। इसी तर्ज पर भोपाल को आर्ट और हेरिटेज के लिए जाना जाए इसके लिए पूरी कवायद है। वहीं, इंदौर फूड और ग्वालियर को म्यूजिक क्षेत्र में शामिल करने की कवायद चल रही है।

सूची में शामिल होने का यह होगा फायदा

वर्तमान में शहर से सटे सांची स्तूप और भीमबैठका की रॉक शेल्टर यूनिस्को की सूची में दर्ज है। इन दोनों के बीचों बीच भोपाल यदि सूची में शामिल होता है तो ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण को लेकर फंडिंग हो सकेगी। इससे यहां पयर्टकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी। साथ ही भोपाल शहर का नाम विश्व पटल पर आ जाएगा।

जारी है सदर मंजिल के रिनोवेशन का काम

नवाब शाहजहां बेगम की यादगार और कभी नगर निगम का मुख्यालय रहे सदर मंजिल व इसके आसपास की ऐतिहासिक इमारतों को संरक्षित करने का काम भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। इमारत को पहले जैसे बनाने में पांच करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। पहले फेज का काम पूरा हो चुका है अब दूसरे फेज का काम चल रहा है।

150 करोड़ की बन चुकी है डीपीआर

बता दें कि स्मार्ट सिटी कंपनी पुराने शहर में मौजूद ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण को लेकर डीपीआर तैयार कर चुका है। इसमें सभी इमारतों के संरक्षण, आपस में कनेक्टिविटी, अंडर ग्राउंड वायरिंग, अतिक्रमण हटाने का प्लान है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 150 करोड़ खर्च का अनुमान लगाया है। केंद्र सरकार ने हृदय योजना के तहत हेरिटेज सिटी को शामिल किया है लेकिन इसमें भोपाल शामिल नहीं हो पाया।