भोपाल। प्रदेश में सवा चार हजार से ज्यादा प्राथमिक सहकारी समिति, 38 जिला सहकारी बैंक सहित अन्य संस्थाओं के चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग से कराने के लिए सरकार को अधिनियमों में संशोधन करना होगा।

संविधान में संशोधन के बाद सहकारी संस्थाओं के चुनाव के लिए शिवराज सरकार ने राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी संस्था बनाई थी, ताकि चुनाव की निष्पक्षता बनी रहे। खाली खजाने का हवाला देते हुए इसे बंद करके राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव कराने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। विधि विभाग ने भी अभिमत दिया है कि राज्य सरकार कानूनों में संशोधन कर ऐसा कर सकती है।

सूत्रों के मुताबिक सहकारिता को संविधान के मूल अधिकारों में शामिल करने के बाद निष्पक्ष चुनाव के लिए राज्यों को कदम उठाने के लिए कहा गया था। दरअसल, प्रदेश में सहकारी संस्थाओं के चुनाव पंजीयक सहकारी सेवाएं कराती आई हैं। इनके ऊपर यह आरोप लगते रहे हैें कि चुनाव सरकार के इशारे पर हो रहे हैं। इससे बचने के लिए राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी संस्था चुनाव के लिए बनाई गई थी।

हालांकि, जब से संस्था बनी है, शीर्ष संस्थाओं के चुनाव ही नहीं हो पाए हैं। किसी न किसी बहाने से सरकार संस्थाओं के चुनाव टलते रहे। कमलनाथ सरकार आने के बाद इस दिशा में काम शुरू हुआ है और सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी ने प्राथमिक साख सहकारी समितियों की सदस्य सूची नए सिरे से बनवाना शुरू करवाया है।

उधर, बजट चर्चा के दौरान खर्च कम करने के लिए इस संस्था को बंद करके चुनाव का काम राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपने के साथ राज्य सहकारी अधिकरण की जगह अपील सुनने का काम राजस्व मंडल को सौंपने पर विचार करने कहा गया है। इन दोनों संस्थाओं के ऊपर सरकार करीब डेढ़ करोड़ रुपए सालाना खर्च करती है।

सूत्रों का कहना है कि मुख्य सचिव सुधिरंजन मोहंती की अध्यक्षता में विभाग प्रमुखों के साथ हुई बैठक में जब यह मुद्दा आया था तो संविधान संशोधन की बात रखी गई थी। संविधान में राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका भी बेहद साफ है। उन्हें पंचायतराज संस्था और नगरीय निकायों का चुनाव कराने का जिम्मा सौंपा गया है।

इसके बावजूद यदि राज्य सरकार आयोग का दायरा बढ़ाना चाहती है तो उसे सहकारी अधिनियम के साथ राज्य निर्वाचन आयोग के नियमों में संशोधन करना होगा। इसके साथ की आयोग को अमला भी देना होगा, क्योंकि हाल ही में पंचायत और निकायों के चुनाव कराने के लिए अस्थाई तौर पर 73 पद कैबिनेट ने स्वीकृत किए हैं। जाहिर है कि इसमें भी बजट व्यय होगा।

इस बार तो प्राधिकारी ही कराएंगे चुनाव

सूत्रों का कहना है कि राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी ने सहकारी संस्थाओं के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी तरह राज्य निर्वाचन आयोग ने भी ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायत के साथ नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद के चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है।

परिसीमन का काम दोनों जगह चल रहा है। मतदाता सूची के लिए पर्यवेक्षक तैनात हो चुके हैं। इसके मद्देनजर माना जा रहा है कि राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी संस्था को बंद करके उसका काम राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपने में अभी वक्त लगेगा।