भोपाल (हरिचरण यादव)। जुगाड़ की शताब्दी एक्सप्रेस। यह शब्द सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लगेगा, क्योंकि देश की प्रीमियम ट्रेन के साथ यह शब्द तालमेल नहीं खाता। लेकिन हकीकत में हबीबगंज-नई दिल्ली शताब्दी जुगाड़ से चल रही है। जुगाड़ भी ऐसा कि कोच के टूटे कांच बदलना छोड़ उनमें पट्टी लगा दी गई। इसके पहले टेप चिपकाए गए थे। हर दूसरे-तीसरे टायलेट के गेट चटकनी खराब होने से ठीक से खुलते व बंद नहीं होते। ये चटकनी ठीक से काम कर सकें, इसके लिए उन्हें लकड़ी के गुटखों की सपोर्ट दी गई है। अग्निशामक यंत्र तो हैं, लेकिन ज्यादातर जंग लगे हुए हैं। आग लगी तो काबू पाने में पसीने छूट जाएंगे। सीट के ऊपर का कवर सालों पुराना दिखाई पड़ता है। सीट नंबर मिटे हुए हैं। आंखों से कमजोर यात्रियों को ढूंढने में मुश्किल होती है। टायलेट के नलों की टोटियां खराब हैं। पानी कब आना बंद हो जाए, इसका भरोसा नहीं। कुल मिलाकर प्रीमियम ट्रेनों में शामिल शताब्दी की इस दुर्गति से यात्री परेशान हैं। रेलवे की छवि खराब हो रही है।

नवदुनिया ने की शताब्दी के कोचों की पड़ताल

सोमवार को भोपाल से नई दिल्ली जा रहा एक यात्री चटकनी नहीं खुलने से शताब्दी के टायलेट के अंदर बंद हो गया था। पूर्व में भी टायलेट की छत से पानी टपकना, नलों से पानी न आना, गेट बंद न होना, कोच में काकरोच घूमने जैसी शिकायतें सामने आ चुकी थीं। इन बातों की सच्चाई जानने के लिए नवदुनिया ने मंगलवार को नई दिल्ली से हबीबगंज पहुंची शताब्दी के कोचों की पड़ताल की। इसमें पूर्व में हुईं शिकायतें सही पाई गईं, बल्कि कई गंभीर लापरवाही भी मिलीं।

ये मिली कमियां

कोच सी-1 - दरवाजे के कांच टूटे हैं। इन्हें मजबूती देने के लिए एल्युमिनियम की पट्टी लगाई है। ये पट्टियां शताब्दी की साख के उलट हैं। एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनों में भी ऐसा नहीं होता। यही हाल कोच सी-4 के दरवाजे में लगे कांचों का है।

कोच-सी-7 - सीटों की पहचान उनके बाजू में कोच की दीवार पर लगी प्लास्टिक पर लिखे नंबरों से होती है, लेकिन ये नंबर स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहे हैं।

कोच सी-8 - टायलेट की चटकनी खराब है। लकड़ी के गुटखे के सहारे लगाई गई है।

कोच सी-11 - बाहर से टायलेट का गेट बंद करने वाली कुंडी गायब है, उसकी जगह टेप चिपका है। टायलेट के अंदर यात्री न हो तो वह खुला रहता है। इन्हीं के आसपास खाने-पीने की सामग्री रखी रहती है।

कोच सी-12 - अग्निशामक यंत्र खराब है। यही हाल कोच सी-13 के कोच समेत अन्य कोचों में रखे अग्निशामक यंत्रों का है।

टेंडर हो गया, जल्दी बदलेंगे कोच

शताब्दी के कोच में कमियों से इनकार नहीं करते। जल्द ही यात्रियों को नए व सुविधाजनक कोच मिलेंगे। इसके लिए टेंडर हो गया है - नितिन चौधरी, सीपीआरओ नार्दन रेलवे नई दिल्ली