भोपाल (ब्यूरो)। आदिम जाति कल्याण विभाग और महिला एवं बाल विकास जैसे अहम विभागों की बजट चर्चा पर सदन मौन रहा। केवल 8 मिनट में बिना चर्चा के बजट पास कर दिया गया। मध्यप्रदेश जैसे पिछड़े और आदिवासी बाहुल्य वाले राज्य में आधी से ज्यादा आबादी के विकास को लेकर जब चर्चा होना थी, तब विधानसभा में सिर्फ शोरगुल होता रहा।

सोमवार को शून्यकाल शुरू होते ही कांग्रेसी विधायकों ने व्यापमं मामले में चर्चा को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। व्यापमं मामले में मुख्यमंत्री के दो जून के जवाब की प्रति न दिए जाने पर नेताप्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे सदन के गर्भगृह में धरने पर जा बैठे। इस बीच अध्यक्ष ने सदन दो बार स्थगित किया।

विपक्ष के अड़ियल रवैए को देखते हुए अध्यक्ष ने हंगामे के बीच ही आदिम जाति कल्याण विभाग और महिला बाल विकास विभाग का बजट बगैर चर्चा कराए पास कर दिया। ये सब मात्र आठ मिनट में पूरा होने के बाद अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने सदन को मंगलवार सुबह 10.30 तक के लिए स्थगित कर दिया।

मुख्यमंत्री के जवाब की प्रति पर अड़े कटारे मांगे जाने पर अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा ने कहा कि कक्ष में आकर बात कर लें, अभी सदन चलने दें। इस पर कटारे भड़क गए, कहा कि जब मुख्यमंत्री ने सदन में जवाब दिया है तो कक्ष में आकर क्यों चर्चा करूं। मुझे जवाब नहीं दिया गया तो मैं गर्भगृह में धरना दूंगा।

इस पर नाराज स्पीकर ने कहा कि सदन आपकी धमकी से नहीं चलेगा, जो करना है करें। ये सुनते ही कटारे अपने सभी विधायकों के साथ गृभ गृह में आकर बैठ गए। इस दौरान कुछ देर तक सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से चली।

विधायक आरिफ अकील ने उकसाया

विपक्ष के शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे होने पर कांग्रेस के विधायक आरिफ अकील ने शेर पढ़ते हुए कटारे से कहा कि 'खामोश मिजाजी तुम्हें जीने नहीं देगी, इस दौर में जीना है तो हंगामा मचा दो" इसके बाद सभी कांग्रेस विधायकों ने खड़े होकर नारेबाजी करना शुरू कर दी।

कांग्रेसी तीन मांगों को लेकर हंगामा कर रहे थे। पहला-मुख्यमंत्री के जवाब की प्रति दो, दूसरा परिवहन आरक्षक भर्ती मामले में सरकार ने जो सदन के बाहर बयान दिया है उसे पटल पर रखो और तीसरा विहिप के डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने इंदौर में जो अल्पसंख्यकों के विरूद्व जहर उगला है उस पर चर्चा कराओ। विपक्ष के हंगामे को देखते हुए अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही जल्दी-जल्दी निपटाई। अध्यक्ष ने पर्यटन राज्य मंत्री सुरेन्द्र पटवा से अपने ध्यानाकर्षण का लिखित जवाब पटल पर रखने को कहा।