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    व्यापमं घोटाले में नाम आना जीवन का सबसे दुखद क्षण : उमा भारती

    Published: Tue, 13 Feb 2018 09:13 PM (IST) | Updated: Wed, 14 Feb 2018 07:31 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    भोपाल। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा है कि व्यापमं घोटाले में मेरा नाम आना जीवन का सबसे दुखद क्षण था। घोटाले में मेरा नाम अनुचित था। वह बोलीं कि अगले तीन साल कमर और घुटने में दर्द की वजह से मैं आराम करना चाहती हूं और कोई चुनाव नहीं लड़ूंगी, हालांकि अभी मंत्री पद पर बनी रहूंगी। उन्होंने कहा कि मेरी राज्यसभा में भी जाने की कोई इच्छा नहीं है। उमा भारती मंगलवार को भोपाल स्थित अपने निवास पर पत्रकारवार्ता को संबोधित कर रही थीं।

    उमा भारती ने यह संकेत भी दिए कि वे राजनीति से अभी संन्यास नहीं ले रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि 75 साल को राजनीति से संन्यास की उम्र मानें तो मेरे पास अभी 17 साल हैं और मैं मप्र के तीन बड़े नेता शिवराज, कैलाश और प्रहलाद से छोटी हूं। उन्होंने कहा कि तीन साल मुझे संयमित दिनचर्या के साथ अपना स्वास्थ्य ठीक करना है। मप्र में चुनाव प्रचार करने की मुझे कोई लालसा नहीं है। मैं वर्ष 2019 के बाद का चुनाव लड़ूंगी।

    मोदी और शाह से की थी इस्तीफे की पेशकश

    उमा ने कहा कि मैंने 2016 में ही प्रधानमंत्री के सामने मंत्रिमंडल से इस्तीफे की पेशकश की थी और उनसे कहा था कि मैं संगठन में रहकर काम करना चाहती हूं। उन्होंने मुझे वजन घटाकर काम करते रहने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि मैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से भी संगठन में काम करने की इच्छा जता चुकी हूं।

    कहा- जल संसाधन में बहुत भ्रष्टाचार था

    पिछले साल जब उमा भारती से जल संसाधन मंत्रालय वापस लिया गया तो यह कयास लगाए जा रहे थे कि केन-बेतवा और अन्य नदी लिंक परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार की वजह से उमा को हटाया गया है। जल संसाधन मंत्रालय को लेकर वह बोलीं कि मैंने जब मंत्रालय संभाला तो उसमें बहुत भ्रष्टाचार था। हमने उस पर लगाम लगाई और केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित कई प्रोजेक्ट को टेंडर स्टेज पर ले आए।

    सुबह 9 से शाम 5 बजे तक करूंगी काम

    उमा भारती ने कहा कि मैं घुटने के दर्द से परेशान हूं। डॉक्टर ने कहा है कि तीन साल संतुलित दिनचर्या की जरूरत है। यात्राओं और सीढ़ी चढ़ने से अभी परहेज करना है। उन्होंने कहा कि अभी सिर्फ सुबह 9 से शाम 5 बजे तक काम करना चाहती हूं।

    जीवन के तीन गौरव बताए

    - तिरंगा यात्रा

    - सितंबर 2010 में राम मंदिर पर फैसला

    - भाजपा से अलग होने पर भी विपक्षी पार्टियों से नहीं मिली

    सबसे दुखद क्षण

    - जब मां का निधन हुआ

    - मेरी भाभी की आत्महत्या

    - व्यापमं घोटाले में नाम आना

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