अंजलि राय, भोपाल। इंदिरा नगर निवासी विद्या चौरसिया की 14 साल की उम्र में उनसे दोगुने उम्र के व्यक्ति के साथ उत्तरप्रदेश में शादी कर दी गई। तब विद्या 7वीं कक्षा में पढ़ती थी । वे 6 बहन और एक भाई हैं। उन्हें पढ़ना पसंद था, लेकिन घर वालों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और वे उसे पढ़ाना नहीं चाहते थे। लिहाजा, उसकी शादी कर दी गई। लेकिन विद्या की पढ़ाई के प्रति ललक कम नहीं हुई। उसकी तीन बेटियां हुईं, जब बेटियों को पढ़ाने का समय आया तो वह भोपाल आ गई।

पति से मिली मदद तो पढ़ाई शुरू की

यहां आकर उसने प्रौढ़ शिक्षा के तहत 11वीं की पढ़ाई की। इसके बाद ओपन स्कूल से 12वीं भी पास कर ली। विद्या ने अपने पति से आगे की पढ़ाई करने के लिए कहा तो वे तैयार हो गए। विद्या कहती हैं कि पति के फर्नीचर पॉलिश का काम करने से परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल था। विद्या कुछ करने के लिए घर से निकलने लगी और बाल विवाह उन्मूलन के प्रति काम करने लगीं। उन्होंने समाजशास्त्र में एमए की पढ़ाई पूरी की और आज स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़कर 25 से अधिक बस्तियों में बाल विवाह उन्मूलन, कुपोषण और घरेलू हिंसा के प्रति महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। उन्होंने कम्प्यूटर में दक्षता हासिल करने के लिए पीजीडीसीए का कोर्स भी किया।

10 बाल विवाह रुकवाए, एनजीओ से जुडीं

विद्या की पड़ोस में रहने वाली छठवीं में पढ़ने वाली एक बालिका का बाल विवाह हो रहा था। जब पता चला तो वे अकेली खड़ी हो गईं और पुलिस को सूचना देकर विवाह रुकवाया। कई लोगों ने इनका विरोध भी किया, लेकिन उनका सफर रुका नहीं और उन्होंने 10 बालिकाओं का बाल विवाह रुकवाया। इसके बाद वे एक एनजीओ से जुड़ गईं और आज बाल विवाह उन्मूलन, घरेलू हिंसा और कुपोषण खत्म करने के लिए लड़ाई लड़ रही हैं।

300 ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूल भेजा

विद्या कहती हैं कि शिक्षा की बदौलत सबकुछ पाया जा सकता है। बाल विवाह, घरेलू हिंसा या कोई भी कुप्रथा को रोकने के लिए बच्चों को शिक्षित करना बहुत जरूरी है। विद्या ने अब्बास नगर, सनखेड़ी, बांसखेड़ी, गुलाब नगर के 300 ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया।

तीनों बेटियां प्राप्त कर रही हैं उच्च शिक्षा

विद्या ने अपनी तीनों बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाई। बड़ी बेटी पढ़ाई के साथ-साथ शिक्षिका भी हैं। वहीं, दूसरी बेटी एमबीए पास कर जॉब कर रही है। तीसरी बेटी नीट क्वालीफाई कर मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। वे कहती हैं कि लोन लेकर तीसरी बेटी को मेडिकल की पढ़ाई कराऊंगी, उसके सपने को पूरा करने के लिए जी-जान लगा दूंगी।