-सालों से कायम परंपरा को नहीं बदल पा रहे जनप्रतिनिधि व अफसर

बुरहानपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

शहर से निकलने वाले गंदे पानी का निपटान करने में सालों से नगर निगम और जनप्रतिनिधि नाकाम रहे हैं। समय-समय पर ताप्ती नदी पर कायाकल्प अभियान चलाकर इसकी सफाई तो की जाती है, लेकि न शहर से निकले नाले-नालियों का गंदा पानी इसमें छोड़ा जाता है, जिससे फिर ढाक के तीन पात वाली स्थिति बन जाती है।

मां ताप्ती निस्वार्थ सेवा समिति के सदस्यों ने ताप्ती नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की मांग की है। समिति सदस्यों के मुताबिक नदी में मिल रहे नालों के पानी की दिशा बदलकर गंदे पानी से नदी को मुक्त कि या जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि छोटे ताप्ती पुल से बकायदा नाले, नालियों का गंदा पानी यहां छोड़ा जाता है। कहने को ताप्ती को जीवनदायिनी मां ताप्ती कहा जाता है, लेकि न इसकी दुर्दशा की तरफ कि सी का ध्यान नहीं है। समय-समय पर मां ताप्ती को चुनरी ओढ़ाई जाती है। समाजसेवी संस्थाएं, आमजन यहां तीज त्योहारों के मौकों पर पहुंचते हैं। बालाजी का मेला भी इसी नदी के बीच लगता है लेकि न इसके बावजूद ताप्ती मैया के आंचल में शहर का गंदा पानी समेटा नहीं जा रहा है। नगर निगम ने सालों बाद भी इस समस्या के निराकरण के कोई प्रयास नहीं कि ए। न ही अब तक कोई कार्ययोजना बनाई जिससे शहर के गंदे पानी को ताप्ती में मिलने से रोका जा सके । उधर, निगम अफसरों के मुताबिक ताप्ती नदी में मिल रहे नालों की समस्या के निदान के लिए अमृत योजना के तहत कार्ययोजना बनाई जा रही है।

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