दमुआ के वेकोलि आवास प्रकरण को लेकर एसडीएम रोशन राय से मिला प्रतिनिधि मंडल

बसाहट बचाने फिर शुरु हुआ राजनीतिक दांवपेंच

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दमुआ /जुन्नाारदेव(निप्र)। जबलपुर हाई कोर्ट में चल रहे दमुआ बसाहट के वेकोलि आवास प्रकरण को लेकर आवास समाधान समिति अध्यक्ष सुनील उइके की अगुवाई में एक प्रतिनिधि मंडल ने जुन्नाारदेव एसडीएम रोशन राय से मुलाकात कर हाईकोर्ट में चल रहे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की। गौरतलब है कि इस मामले में आगामी 22 मार्च को मप्र शासन को जबलपुर हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखना है।

प्रतिनिधि मंडल में आवास समाधान समिति के अध्यक्ष सुनील उइके, वरिष्ठ नेता सतीश नारायण शुक्ला, भोलू सिंह ठाकुर, दमुआ नपाध्यक्ष सुभाष गुलबांके, जुनारदेव ब्लाक अध्यक्ष घनश्याम तिवारी , दमुआ ब्लाक अध्यक्ष विनोद निरापुरे, छोटू पाठक, जुन्नाारदेव नगर अध्यक्ष सुधीर लदरे उपस्थित थे।

क्या है मामला

दमुआ की सबसे बड़ी बसाहट के दो खसरों 151 और 237 में तीन वार्डो वाला मोहल्ला बारह नम्बर और मुख्य बाजार आबाद है। दमुआ की पहली निर्वाचित और तत्कालीन परिषद अध्यक्ष प्रभा झरबड़े के सत्तासीन रहते यह मामला तत्कालीन सत्तासीन दल विपक्ष और स्थानीय राजनीति में जबरदस्त दखलंदाजी रखने वालों की कृपा से अपने मुकाम तक पहुँचा था। उस समय तत्कालीन नपाध्यक्ष के निर्माणाधीन भवन को लेकर एक याचिका कर्ता ने स्थानीय स्तर से एक जनहित याचिका लगाई थी। न्यायालयीन प्रक्रिया की परवाह किये बगैर भवन बन रहा था। याचिका स्थानीय स्तर से गुजरते हुए हाई कोर्ट तक पहुंच चुकी थी । आमतौर पर देश के कोयलांचलो में बसाहट ऐसी ही फैलती है जैसी यहां फैली थी। हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से लेकर वेकोलि प्रबन्धन तक को तलब किया। सुनवाइयों के दौरान दो पक्षों में से एक ने अपने वकीलों के जरिये यह बताने का प्रयास किया कि इस बसाहट में वे अकेले ही नहीं बल्कि कई और भी है। इसके बाद से बसाहट पर उजाड़ क़ा सकंट आ गया। स्थानीय व्यापारियों, नागरिकों ने इस मुद्दे को स्थानीय स्तर पर सुलझाने के प्रयास शुरू ही किये थे कि इसमें राजनीति घुस गई। दो दल आमने सामने आ गए। इस बीच स्थानीय निकाय चुनाव सम्पन्ना हुए जिसमें तत्कालीन सत्ताधारी दल भाजपा के हिस्से में जोरदार हार आयी। इन चुनावों के बाद जनता इस मुद्दे को लगभग भूल चुकी थी कि समिति के प्रतिनिधि मंडल ने एसडीएम रोशन राय से चर्चा कर इस नासूर को एक बार फिर हरा कर दिया।

शुरू हुए राजनीतिक दांवपेंच

ऐसा लगता है कि चुनाव नदीक आने के साथ ही दमुआ बसाहट को उजड़ने और बचाने के राजनीतिक दांवपेंच एक बार फिर शुरू हो गए है। राजनीतिक छल प्रपंच द्वेष और आपसी बैर की वजह से दमुआ की बसाहट का मुद्दा ना केवल दमुआ के लिए बल्कि जिले के कोयलांचल कन्हान और पेंच से भी बढ़कर पूरे कोल इंडिया स्तर का नासूर बना दिया गया था। कम से कम दमुआ के मामले में तो यह साफ समझ मे आता है कि इस मुद्दे पर एक राजनीतिक दल ने हाल ही में एक चुनाव जीत लिया ।अब 2018 और 2019 की चुनावी जंग भी इसी नासूर को हरा करके जीतने का इरादा है ।