- 121 गांवों के लोगों की समस्या से कि सी को सरोकार नहीं

छतरपुर, बकस्वाहा। नईदुनिया प्रतिनिधि

विकासखंड के 121 गांवों के लाखों लोगों को सुविधाजनक इलाज के लिए बकस्वाहा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो बना दिया, लेकि न डाक्टर की कमी और असुविधाओं के कारण यहां लोगों को इलाज मिलना मुश्किल हो गया है जिससे उनकी परेशानी बराबर बनी है।

जिला मुख्यालय से करीब 100 कि मी दूर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बकस्वाहा पर इस अंचल के करीब 121 गांवों के डेढ़ लाख से अधिक लोग इस इलाज के लिए निर्भर हैं, लेकि न सही मायने में इस स्वास्थ्य केंद्र को इलाज की दरकार है। अस्पताल में हमेशा डाक्टरों की कमी बनी रहती है और स्टाफ की लापरवाही से इलाज मिलने में सुविधा कम और दुविधा ज्यादा है। अस्पताल में जरुरी साधनों की व्यवस्था है। अच्छा खासा भवन है, लेकि न यहां आने वाले मरीजों को इलाज नहीं मिलता है। यह समस्या पिछले कई सालों से बराबर बनी है। ऐसा नहीं कि लोगों की इस परेशानी के बारे में जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जानकारी न हो, लेकि न कोई भी इस दिशा में कु छ भी नहीं कर सका, जिसका खामियाजा आम लोगों को बराबर भुगतना पड़ रहा है। कई बार तो यहां आने वाले गंभीर बीमारों, प्रसव के लिए दर्द से तड़पती प्रसूताओं को समय से सही इलाज न मिलने के कारण इनकी जान पर बन आती है। पिछले तीन महीनों में करीब एक दर्जन लोग गंभीर हालत में यहां आकर निराश होने के बाद छतरपुर पहुंचे तब उन्हें इलाज मिला। वहीं करीब 6 लोगों की मौत हो गई। एक प्रसूता को तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बकस्वाहा में इलाज न मिलने से उसके गरीब परिजन प्रसूता को बैलगाड़ी में रखकर छतरपुर पहुंचे थे। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में असुविधाओं से परेशान मरीजों को मजबूरी में अपना इलाज ग्रामीण अंचल में सक्रिय नीम हकीम और झोलाछाप डाक्टरों से कराने को मजबूर होना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बकस्वाहा में एक महिला चिकि त्सक सहित डाक्टरों के कुल 6 पद स्वीकृत हैं। इनमें से के वल एक पद बीएमओ डॉ. एलएल अहिरवार के रूप में भरा है। बाकी सभी पद खाली हैं। देखने वाली बात ये है कि दिन में यहां मरीजों को आसानी से इलाज नहीं मिलता है और यदि मरीज रात में आ जाए तो उसे इलाज मिलना नामुमकि न ही रहता है। जब यहां डाक्टरों की कमी है और जो डाक्टर हैं वे ही लापरवाह रहते है तो इसका सीधा फायदा उठाकर स्टाफ के अन्य सदस्य भी लापरवाह हो गए हैं।

परिसर में फैला है कचरा, कूड़े में मिलती हैं दवाएं

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बकस्वाहा में सारी व्यवस्थाएं भगवान भरोसे हैं। पूरे परिसर में कचरा और आवारा घूमने वाले मवेशियों को गोबर पड़ा रहता है। परिसर में बीड़ी सिगरेट के अवशेष पड़े रहते हैं। न तो अस्पताल में मरीजों के बैठने के लिए कोई स्थान है न पीने के लिए पानी ही मिलता है। आश्चर्य तो ये है कि अस्पताल की दवाएं अकसर कचरे के ढेर पर पड़ी दिखाई देती हैं। अस्पताल में एक्सरे और खून की जांच की सुविधा भी नहीं है। यहां स्वीकृत एम्बुलेंस शोपीस बनी है। प्रसूताओं के लिए कोई सुविधा नहीं है। मरीजों को न तो अस्पताल से दवाएं दी जाती हैं न इंजेक्शन की सीरेंज ही मिलती हैं। प्रसूताओं के लिए प्रसव के समय जरुरी ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की कमी बनी रहती है। अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन व सर्पदंश के इलाज के लिए एएसव्ही मेडीसन हमेशा ही अनुपलब्ध रहती है।

मरीजों को रहता है जान का जोखिम

इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि बकस्वाहा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को जब इलाज नहीं मिलता है तो उन्हें 100 कि मी दूर स्थित जिला चिकि त्सालय छतरपुर या करीब 90 कि मी दूर स्थित सागर या फिर 50 कि मी दूर स्थित दमोह के जिला चिकि त्सालय तक ले जाना पड़ता है। इतनी दूरी तय करते समय मरीज की जान का जोखिम बना रहता है। कई बार जो रास्ते में ही गंभीर पीडि़त मरीज अंतिम सांस ले लेता है या फिर कई दिनों तक उसे जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करना पड़ता है। स्थानीय लोगों को इस बात की शिकायत है कि वे अपने मतों से सांसद व विधायक तो हर बार चुनते हैं लेकि न चुने हुए जनप्रतिनिधि आज तक अस्पताल की परेशानियों का निदान नहीं करा सके हैें।

इनका कहना है

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बकस्वाहा की समस्या के बारे में जानकारी है। अभी चुनाव प्रक्रिया जारी है।चुनावों के बाद यहां की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए प्रमुखता से प्रयास कि ए जाएंगे।

डॉ. व्हीएस बाजपेई

सीएमएचओ, छतरपुर

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बकस्वाहा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बकस्वाहा।