बिजावर विधानसभा क्षेत्र ....

- बिजावर विधानसभा क्षेत्र में इस बार बदल सकते हैं हार और जीत के समीकरण

- पांच दशक में हर चुनाव में रहा भाजपा और कांग्रेस का मुकाबला

दिलीप सोनी-नितिन तिवारी

छतरपुर। मध्यप्रदेश के गठन के बाद से ही बिजावर विधानसभा का रिकार्ड रहा है कि यहां जो भी विधायक बना, वह बाहरी था। यहां की जनता ने सिर्फ एक बार बिजावर महाराज गोविंद सिंह को अपना विधायक चुनाव, लेकि न अन्य चुनावी आंकड़े यह कहानी बयां करते हैं कि यहां पिछले पांच दशक में जनता को बाहरी प्रत्याशी ही दिया गया। इस बार के चुनाव में हार और जीत के आंकड़े बदल सकते हैं लेकि न पिछले आंकड़ों को देखें तो यहां मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रहा है।

इसे बिजावर विधानसभा क्षेत्र का दुर्भाग्य ही कहें कि जबसे विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई तब से लेकर आज तक बिजावर क्षेत्र में बाहरी प्रत्याशी अपना परचम लहराते रहे हैं। सिर्फ एक बार ही बिजावर महाराज निर्दलीय तौर पर मैदान में उतरे और उन्हें जनता ने जीत भी दिलाई, लेकि न इसके बाद से इस क्षेत्र के मतदाता बाहरी प्रत्याशियों को आशीर्वाद देते चले आ रहे हैं। जब मध्यप्रदेश का गठन हुआ था तो वर्ष 1957 के चुनावों में एक विधानसभा से दो सदस्य चुने जाने की परंपरा थी, जिसमें एक सवर्ण के साथ एक अजा वर्ग का व्यक्ति चुनाव लड़ता था। पहले चुनाव में बिजावर विधानसभा में कांग्रेस से गायत्री देवी परमार और हंसराज मैदान में थे। दोनों ने मिलकर जनसंघ के रामस्वरूप खरे को हराया था। इस चुनाव में गायत्री देवी को 12352 एवं हंसराज को 10509 मत प्राप्त हुए थे। इसके बाद वर्ष 1962 में एक सदस्य चुने जाने की व्यवस्था हो गई थी, जिसके तहत कांग्रेस के जंग बहादुर सिंह चुनाव मैदान में उतरे तो निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में महाराजा गोविंद सिंह ने मैदान संभाला। जनता का आशीर्वाद गोविंद सिंह जू देव को मिला, लेकि न इस चुनाव के बाद से बिजावर क्षेत्र में कि सी स्थानीय प्रत्याशी को चुनावों में मौका नहीं मिल पाया। वर्ष 1957 के चुनाव में गायत्री देवी ने कांग्रेस से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1962 में गोविंद सिंह जू देव निर्दलीय तौर पर विजयी हुए थे। वर्ष 1967 में बिजावर की जनता ने के दारनाथ रावत को कांग्रेस से विजयी बनाया जबकि 1972 में यादवेंद्र सिंह जनसंघ से विजयी हुए थे। 1977 में मुकु ंद सखाराम नेवालकर ने निर्दलीय दशरथ को हराया था। वर्ष 1980 के चुनाव में यादवेंद्र सिंह बुंदेला कांग्रेस से मैदान में उतरे और उन्होंने भाजपा के मुकुंद सखाराम नेवालकर को महज 1000 के अंतर से हराया था। बिजावर विधानसभा में वर्ष 1985 और 90 के चुनाव में लगातार दो बार भाजपा की जीत हुई और जुझार सिंह बुंदेला ने कांग्रेस के प्रत्याशी वीर सिंह और मानवेंद्र सिंह को करारी हार दी थी। इस दो चुनावों के बाद वर्ष 1993 में कांग्रेस पार्टी से मानवेंद्र सिंह बिजावर विधानसभा से चुनाव मैदान में आए और उन्होंने भाजपा के जुझार सिंह बुंदेला को दो बार हराया। वर्ष 2003 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का टिकट पाकर जीतेंद्र सिंह बुंदेला ने कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह को हराकर जीत दर्ज की थी। 2008 के चुनाव में भाजपा से आशारानी सिंह को टिकट दिया गया, जिन्होंने कांग्रेस के राजेश शुक्ला को ढाई हजार के मतों के अंतर से शिकस्त दी थी। वर्ष 2013 के चुनाव में भाजपा से नौगांव के पुष्पेंद्र नाथ पााठक को चुनाव मैदान में उतारा। क्षेत्र की जनता ने इन्हें भले ही बाहरी माना, लेकि न मेहमान समझकर इस क्षेत्र की जनता ने स्वीकार कि या, लेकि न इस बार जनता का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है।

बिजावर विधानसभा में कब कौन हारा और जीता

वर्ष विजेता मत निकटतम प्रतिद्वंदी मत

1957गायत्रीदेवी परमार12352हंसराज10509

1962गोविंद सिंह जू देव30518जंगबहादुर सिंह2632

1967के दारनाथ रावत10861यादवेंद्र सिंह 8660

1972यादवेंद्र सिंह22893देव शर्मा15685

1977मुकु ंद सखाराम 24657दशरथ14512

1980यादवेंद्र ंिसह 16774मुकु ंद सखाराम15008

1985जुझार सिंह बुंदेला24827वीर सिंह 18922

1990जुझार सिंह बुंदेला32931मानवेंद्र सिंह 28636

1993मानवेंद्र सिंह 46228जुझार सिंह31601

1998मानवेंद्र सिंह41204जीतेंद्र सिंह 39602

2003जीतेंद्र सिंह 59569मानवेंद्र सिंह36142

2008आशारानी सिंह24589राजेश शुक्ला22518

2013पुष्पेंद्रनाथ पाठक50576राजेश शुक्ला 40197

अपनों ने दिया दगा तो बन गए बागी

बिजावर विधानसभा क्षेत्र में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रहा है। दोनों ही दलों को वर्ष 1957 से अब तक हुए चुनावों में इस क्षेत्र की जनता ने भरपूर समर्थन दिया। पांच दशक के चुनावों के दौरा क्षेत्र से भी कांग्रेस और भाजपा के दिग्गज नेता हुए, जिन्होंने दोनों की दलों में महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी निभाई लेकि न पार्टी ने उन्हें इस क्षेत्र से प्रत्याशी नहीं बनाया और बनाया तो एक बार हार के बाद उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया, जिससे इस क्षेत्र के नेता बगावती तेवर अपनाने लगे हैं। वर्तमान चुनावी परिदृश्य पर नजर डालें तो यहां भाजपा ने पुष्पेंद्रनाथ पाठक को टिकट दिया है जबकि कांग्रेस से टिकट की दौड़ में अव्वल रहे राजेश शुक्ला बबलू को दरकिनार कर राजनगर विधानसभा के पूर्व विधायक शंकर प्रताप सिंह मुन्नाराजा को बिजावर से प्रत्याशी बना दिया है। यही कारण है कि कांग्रेस के क्षेत्रीय नेता राजेश शुक्ला के पक्ष में जनता न सिर्फ मैदान में आ गई और उन्हें चुनाव लड़ने के लिए तैयार कर साइकि ल की सवारी करा दी। ईशानगर क्षेत्र के एक युवा समाजसेवी गुलाब सिंह ठाकु र कु र्‌रा के नेतृत्व में सैकड़ों युवाओं ने उन्हें बकायदा समर्थन देकर नामांकन फार्म भी दाखिल कराया है। इस बार बाहरी प्रत्याशी के रूप में भाजपा के पुष्पेंद्रनाथ पाठक, कांग्रेस से शंकर प्रताप सिंह मुन्नाराजा और सपा से राजेश शुक्ला बबलू के बीच रोचक मुकाबला होगा।