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    यहां औरंगजेब की सेना ने किया था महादेव प्रतिमा पर तलवार से वार, निकल पड़ी थी दूध की धारा

    Published: Wed, 14 Feb 2018 05:41 PM (IST) | Updated: Wed, 14 Feb 2018 05:52 PM (IST)
    By: Editorial Team
    lalitpur 14 02 2018

    ललितपुर। जनपद के कस्बा पाली में स्थित भगवान श्री नीलकंठेश्वर मंदिर का महत्व विशेष है, बताते है कि औरंगजेब के सैनिक ने पाली में स्थित नीलकंठेश्वर की प्रतिमा को खंडित करने के लिए तलवार से प्रहार कर दिया था, जिससे प्रतिमा को चोट लगने वाले स्थान से दूध की धारा बह निकली थी।

    यह चमत्कार भोले नाथ का देख मुगल सेना महिमा को प्रणाम कर वहां से चली गई थी। ऐसे नीलकंठेश्वर महाराज की अद्भुत प्रतिमा की पूजा अर्चना के लिए प्रतिवर्ष हजारों लोग आते है। प्रतिमा के पीछे हिस्से में एक दरार थी, जिसमें सिक्का डालने पर नीचे से खजाने में गिरने जैसे आवाज आती थी। बाद में उस दरार को बंद कर दिया गया।

    बताते चलें कि मुख्यालय से 25 किमी दूर कस्बा पाली में विंध्यांचल पर्वत की पहाड़ी पर 1300 वर्ष पूर्व चंदेलकालीन

    राजाओं द्वारा निर्मित श्री नीलकंठेश्वर मंदिर लाखों श्रद्धालुओं का आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर अपनी कोख में हजारों, वर्षों पुरानी संस्कृति व सभ्यता को छिपाए है। यही वजह है कि वर्ष भर यहां पर शिवभक्तों का तांता लगा रहता है। मंदिर जाने के लिए करीब 108 सीढ़ियों पर चढ़कर पहुंचा जाता है। मंदिर में काले, बलुवे पत्थर पर भगवान शिव की त्रिमुखी अदभुत प्रतिमा विराजमान है।

    अमित पांडे बताते है कि नीलकंठेश्वर की प्रतिमा नवीं, दसवीं सदि में चंदेल कालीन राजाओं द्वारा बनाया गया था। मंदिर में भगवान शिव की त्रिमुखी प्रतिमा के नीचे फर्श पर एकमुखी शिवलिंग स्थापित है। दन्तकथा के अनुसार मुगलकाल में जब औरगंजेब की सेना में इस पौराणिक प्रतिमा को खंडित करने के लिए हमला किया था तो एक सैनिक ने तलवार से प्रतिमा के दाएं भाग पर प्रहार किया था। जिसमें चोट लगे स्थान से दूध की धारा वह निकली थी।

    भोले बाबा का यह अदभुत चमत्कार देख मुगलसेना इस महिमा को वहां से भाग खड़ी हुईं थी। बताते है कि मंदिर के पीछे हिस्से में एक दरार थी।

    सपने में दर्शन हुए तो धरने लगे भोलेनाथ का स्वरूप

    सपने में भगवान भोलेनाथ के दर्शन होने के बाद से लगातार आठ वर्षों से यह व्यक्ति महाशिवरात्रि के दिन सबकुछ छोड़कर भोले के रूप में आ जाता है और निकलने वाली शोभायात्रा में शामिल होता है। बताते चलें कि कस्बा पाली निवासी अमित पांडेय अपने दो भाई बहनो में सबसे बड़े है, स्नातक की पढ़ाई करने के बाद 18 वर्षो से पत्रकारिता से जुड़े अमित पांडेय को आठ वर्ष पूर्व 2010 में जब वह रात में सो रहे थे तो उन्हें भगवान भोलेनाथ के दर्शन हुए। जिसके बाद वह भगवान शिव की पूजा अर्चना करने सुबह से मंदिर जाने लगे, उसी वर्ष महाशिवरात्रि पर्व पर शोभायात्रा निकाली जानी थी। तो अमित कामधाम छोड़ भोलेनाथ के वेशभूषा में शोभायात्रा में पहुंच गए, जिसके बाद शोभयात्रा आकर्षण का केंद्र बन गयी अब प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के पर्व पर पत्रकार भगवान भोलेनाथ के स्वरूप में शोभायात्रा में शामिल होते है।

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