महोबा, अजनर। नईदुनिया न्यूज

सरकार द्वारा राशन वितरण के लिए कोटेदारों को दी गई ई-पॉश मशीनें उपभोक्ताओं के लिए जी का जंजाल बन गई हैं। पिछड़े ग्रामीण इलाकों में मशीनों पर जहां नेटवर्क की समस्या भारी पड़ रही है, वहीं मशीन में लोगों के अंगूठे का निशान मैच न होने से लोगों को राशन नहीं मिल है।

बुजुर्गों व कामकाजी मजदूरों के साथ अंगूठे के निशान का मिलान की समस्या सबसे अधिक है, दरअसल इनके अंगुलियों के निशान घिस जाने से मशीन पर स्पष्ट नहीं होते हैं, ऐसे में राशनकार्ड धारक सारे कामकाज छोड़कर राशन वितरण की दुकान पर ही लाइन लगाए खड़े रहते हैं। ऐसा ही ताजा मामला जनपद के ग्राम मुड़ारी में सामने आया है। जानकारी के अनुसार ग्राम मुड़ारी में राशन की 3 दुकानें हैं। इन तीनों दुकानों में ही अक्सर सर्वर की समस्या बनी रहती है। जैसे-तैसे सर्वर आते हैं तो अंगूठा निशान ही मैच नहीं करता है। इससे यहां वितरण का कार्य बहुत धीमा चल रहा है। ऐसे में कम पढ़े लिखे उपभोक्ता कोटेदारों को दोष देते हैं, जिससे कई बार झगड़े की स्थिति पैदा हो जाती है।

वहीं ग्राहकों के साथ-साथ कोटेदारों के लिए भी समस्या बढ़ गई है। ऐसे परिवार जो कोटे के राशन के ही भरोसे हैं, वो दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज हैं। ऐसे में संक्रांति के त्यौहार में उन्हें खाना भी नसीब नहीं हो रहा है। राशन की दुकानों से खाली हाथ आने वालों में 82 वर्षीय विधवा राजाबाई, 72 वर्षीय नेत्रहीन युवक प्यारेलाल ने बताया कि वे पिछले पंद्रह सालों से सरकारी राशन की दुकान से मिलने वाले राशन पर ही पूरी तरह से आश्रित हैं। कभी सर्वर न होने तो कई बार अंगूठे का निशान न आने से उन्हें राशन नहीं मिल रहा है। जिससे वे रोजी रोटी के लिए मोहताज हो रहे हैं। विधवा मन्नू उर्फ शीला सेन ने बताया कि उसे न तो पेंशन मिलती है, न राशन मिलता है ऐसे में उसे अपने बच्चों का भरण-पोषण करने में समस्या आ रही है।

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