छतरपुर, चंदला। नईदुनिया प्रतिनिधि

चंदला विधानसभा क्षेत्र के एक बड़े हिस्से में खेतों को सूखने से बचाने के लिए कि सानों को अब बरियारपुर बांध व इसकी नहरों से पानी मिलने की उम्मीद नहीं रही है। ऐसे में खेतों में खड़ी फसलों को सूखने से बचाने के लिए कि सान कुओं में मोटर लगाकर करीब दो -दो हजार फु ट पाइप बिछाकर बमुश्किल पानी पहुंचाने में लगे हैं।

प्रदेश में जो भी सरकार सत्ता पर काबिज होती है वो सरकार कि सानों को सिंचाई सुविधाएं देने और हर खेत तक कृषि की योजनाएं पहुंचाने का दावा करती है, लेकि न चंदला विधानसभा क्षेत्र में ये सारे दावे खोखले साबित हो जाते हैं। चंदला क्षेत्र में खेतों को सींचने के लिए लगभग 40 साल पहले मध्य प्रदेश की सीमा में के न नदी पर बने बरियारपुर बांध से बरियारपुर बांई नहर परियोजना का जैसे ही आरंभ हुआ वैसे ही लोगों को इस बात की उम्मीद बंध गई थी कि अब उनके खेत प्यासे नहीं रहेंगे। मगर यह उम्मीद अब नाउम्मीद में बदल गई हैं। यहां बता दें कि 80 कि मी लंबी बरियारपुर बांई नहर चंदला, बछौन सर्किल से होते हुए गौरिहार तहसील के सरबई सर्किल में यूपी की सीमा तक पहुंचती है। इस बार बरियारपुर बांध में पानी कम होने से कु टने डेम से सहारे की उम्मीद थी, लेकि न उसमें भी पानी न होने से नहरों से सभी खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। दरअसल सही मायने में इस परियोजना से अंचल के खेतों में सिर्फ पलेवा के लिए ही पानी मिल पाता है, इसके बाद फसलें पूरी तरह से राम भरोसे बनी रहती हैं। इस बार रबी सीजन में 22 अक्टूबर को एक बार ही पानी छोड़ा गया है। ऐसे में चंदला विधानसभा क्षेत्र के आधे से भी कम हिस्से के खेतों को ही पानी मिला है अन्य सभी हिस्सों में पानी न मिलने से खेतों में फसलें सूखने लगीं है। यहां तक कि कि सानों की मानें तो पानी न मिलने से गौरिहार तहसील के अधिकांश खेतों में बोवाई ही नहीं हो पाई है। इन दिनों

कि सानों को इस बात की चिंता है कि वे खेतों में खड़ी रबी सीजन की फसलों को आखिर सूखने से कै से बचाएं। सूखी नहरें देखकर अब कि सान कुओ में मोटर लगाकर कि सी तरह सिंचाई की व्यवस्था करने में लगे हैं।फिर भी खेतों को भरपूर पानी नहीं मिल पा रहा है। चंदला क्षेत्र के बुर्जुग कि सानों के अनुसार तिलहन की फसलें पितरों के समय बोई जाती हैं, जबकि दलहन की फसलों को दीपावली तक बोने के बाद 28 नवंबर से गेंहू की बुवाई की जाए तो सभी फसलें अच्छी होती हैं लेकि न इसे कि सानों के लिए दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि नहरों से के वल एक ही पानी मिलने से कि सान पलेवा के बाद अब दलहन की फसलें बोने को मजबूर हैं। क्षेत्र के अधिकांश खेतों में चना और गेहूं की बुवाई का रकबा काफी कम हो गया है।

कम बारिश बन रही मुसीबत

चंदला विधानसभा और राजनगर विधानसभा के कु छ गांवों को में सिंचाई के लिए बरियारपुर बांध, कु टनी डैम और सिंहपुर बैराज का निर्माण कि या गया है,लेकि न इन बांधों में कम बारिश होने के कारण जल भराव नहीं हो पाया है। पिछले चार वर्षों से अपेक्षा से अधिक बारिश न होने से बरियारपुर बांध में पानी नहीं है। गेहूं की फसल के लिए चार बार पानी, दलहन फसलों के लिए पलेवा के बाद एक पानी की जरूरत होती है लेकि न इस अंचल के कि सानों को के वल एक बार ही पानी मिल रहा है। अधिकारी बताते हैं कि बरियारपुर बांध में 32 एमसीएम पानी होने के बाद जो पानी शेष रहता है उसका अधिकार बरियारपुर बांई नहर में छोड़ने का होता है। यहां बता दें कि छतरपुर जिले के चंदला अंचल से गुजरी के न नदी पर अंग्रेजों के जमाने में बरियारपुर बांध का निर्माण कि या गया था, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने कब्जे में लेकर उसका लाभ भी उत्तर प्रदेश के कि सानों को देना शुरु कर दिया था। बाद में मध्य प्रदेश सरकार ने भी चंदला अंचल में इस बांध से बरियारपुर बांई नहर परियोजना से गांव-गांव तक नहरों का जाल बिछा दिया। इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि इस योजना से अधिकांश पानी उप्र को मिल रहा है और मप्र के हिस्से में कम पानी आ रहा है। इसी का खामियाजा चंदला अंचल के कि सानों को भोगना पड़ रहा है। कि सानों का आरोप है कि जनता के मतों से चुने गए विधायक और सांसद क्षेत्र की असल समस्या को हल करने में कोई तबज्जो नहीं दे सके हैं।

-----------------------------------------------

नोट - समाचार के साथ फोटो 26 व 27 लगाएं, के प्सन है -

चंदला। खेतों में सिंचाई के लिए पंप से पानी निकालते कि सान।- 26

चंदला। बांध में पानी का अपर्याप्त भराव।- 27

कथन

इस बार बारिश कम होने के कारण

कुटने डैम में पूर्व से ही पानी काफी कम था। कि सानों को नहरों से एक पानी दे दिया गया है अब दूसरा पानी देना संभव नहीं है। ऐसे में पहले भी कि सानों से कहा गया था कि वे असिंचित फसलों की ही बोवाई करें।'

आईबी नायक

कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन छतरपुर

चंदला अंचल : फै क्ट फाइल

कु ल गांव-88

सर्किल-चंदला, बछौन

चंदला सर्किल रकबा-19842.978 हेक्टेयर

बछौन सर्किल रकबा-20 हजार हेक्टेयर लगभग

बरियारपुर बांई नहर-लगभग 80 कि मी लंबी

बरियारपुर बांध-अधिकांश पानी यूपी में

कु टनी डेम-पूरा पानी बरियारपुर नहर में

सिंहपुर बैराज-लवकु शनगर, राजनगर क्षेत्र के कु छ गांवों को सहारा