घुवारा। जैनधर्म के महा संत आचार्य विधासागर महाराज का मंगल प्रवेश घुवारा नगरी में हुआ तो अगुवाई के लिए श्रद्घालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस मौके पर आहार चर्या भी सम्पन्न हुई।

नगर घुवारा में जब आचार्य श्री के पग पड़े तब आसमान से उगलती आग को संयम की ठंडक ने क्षार क्षार कर दिया। उनकी सौम्यता ने बुंदेली धरती को पावन कर दिया, वात्सल्यता ने भाव विभोर कर दिया। आचार्य श्री हीरापुर से होते इंदौरा के प्राथमिक शाला में रूके थे। जहां से बमनोराकलां होते हुए घुवारा पहुंचे। जहां खुले मंच से हायर सेकंडरी मैदान में उनके मंगल प्रवचन हुए। आचार्य श्री ने प्रवचन में कहा कि मुझे याद है जब में 38 साल पहले द्रोणगिरि आया था। बुंदेली भाषा मे आचार्य श्री ने कहा कि इते उते चौका की व्यवस्था हो जाती थी। सो इते उते की गलियां याद है। उन्होंने कहा कि जीवन में जीवनोपयोगी पुरुषार्थ हम सभी को करना चाहिए। आत्मकल्याण ही सच्चा पुरुषार्थ है। हम सभी को अपने कर्तव्य करना चाहिए साथ ही वीतरागता धारण करके जन्म मरण से मुक्त होना चाहिए। हमें राग, द्वेष न करके अपने आपको को पहचानना चाहिए। घुवारा में जतारा से आए महानुभाव के यहां पंडित रमेश चंद्र भोयरा के घर पर आहार हुए। आचार्य श्री के साथ 35 मुनिराज एवं माताजी साथ चल रही हैं। घुवारा में जिला कलेक्टर रमेश भंडारी, छतरपुर, सागर, बंडा एसडीएम, एसडीएम राजीव समाधिया, बक्सवाहा तहसीलदार विनीता जैन, एसडीओपी पीके सारस्वत, बमनोरा थाना प्रभारी आरएस उपाध्याय, मेडिकल आफिसर डॉ. वैभव अग्रवाल समेत प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। वही जनप्रतिनिधियों में विधायक रेखा यादव, जनपद अध्यक्ष अनीता रमेश राय, नगर परिषद अध्यक्ष अरूणाराजे बुंदेला, विनय राजा, भक्ति राजा बुंदेला, दादा अमरवा, युवा मोर्चा अध्यक्ष लखन फौजदार शामिल हुए। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का लाभ डॉ. ज्ञान चंद्र जैन परिवार, निर्मल बारों के साथ गोहवटी से आए परिवार को मिला। जिला कलेक्टर समेत अन्य लोगो ने जेल में कैदियों द्वारा निर्मित वस्त्रों के लिए कई हथकरघा भेंट करने की घोषणा की।

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घुवारा। मंगल प्रवचन करते आचार्य विद्यासागर महाराज।