मानसूनी मौसम में अभी देर, जनजीवन अस्त व्यस्त

जवाब दे गए हैंडपंप, ठप हो गईं नलजल योजनाएं

छतरपुर। सूखे के हालातों ने जनजीवन को अस्त व्यस्त कर दिया है। भीषण गर्मी के दौर में ताल तलैयों का पानी उड़ गया है तो कुएं भी सूख चुके हैं। गर्मी के इस दौर में आम जनजीवन कठिनाईयों के दौर से गुजर रहा है। पानी के लिए पसीना बहा रही आबादी अब मानसूनी मौसम का बाट जोह रही है। जलसंकट के इस भयावह समय में सरकारी मशीनरी और जनप्रतिनिधि बेपरवाह नजर आ रहे हैं।

इस वर्ष अपेक्षा से कम बारिश होने के कारण सर्दियों के मौसम से ही जलसंकट उत्पन्न हो गया था। समूचे अंचल के लोग पिछले लगभग पांच माह से पानी जुटाने की जुगाड़ में दूर दूर तक भटक रहे हैं। जिला मुख्यालय के अलावा कस्बाई क्षेत्रों में पानी की समस्या ने गंभीर रूप ले लिया है। अधिकांश तालाब और तलैया सूख गई हैं। कुएं गंदगी से पटे पड़े हैं। वहीं नलजल योजनाएं शोपीस बनकर रह गई हैं। महाराजपुर तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत मझगुवां, बेदार, उर्दमऊ, मलकरा, खिरी, गोहानी, बुडरक, बर्रोही, टटम, सिंहपुर, कुर्राहा, पड़वाहा, सिंदुरखी, बरद्वाहा, मऊश्याला, पुर और विकौरा सहित कई अन्य पंचायतों में लोग बूंद बूंद पानी के लिए परेशान हैं। लोगों को दूर दराज स्थित खेतों में बने कंुओं से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007-08 में हर पंचायत के लिए नलजल योजना मंजूर की गई थी। इसके तहत पंचायत स्तर पर बोर कराके ट्यूबबैल लगाने, पंप हाउस बनाने और टंकियां बनाकर पाइप लाइन बिछाने का प्रावधान था, लेकिन नलजल योजनाओं का पूरा काम कागजो ंपर पूरा कर लिया गया। ऐसे में यह महत्वपूर्ण योजना अधिकारियों और पंचायत के झमेले में फंसकर ग्रामीणों को सुविधा नहीं दे पाई। ग्राम पंचायत सिंदुरखी, सिंहपुर, मऊ, सैला, बेदार, खिरी, ऊजरा, पड़वाहा में योजना के तहत तैयार टंकियां बचरे के ढेरों पर पड़ी हैं। पाइप लाइन या तो बिछाई नहीं गई या फिर टूटी पड़ी हैं।

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नदी, नालों से ब्यर्थ बहाया बारिश का पानी

जिले के विभिन्न इलाकों से गुजरी नदियों और नालों पर पानी रोको अभियान के तहत स्टापडेमों का निर्माण लाखों की लागत से कराया गया था लेकिन जिम्मेदारों की मनमानी का आलम यह रहा कि स्टापडेमों में फाटक ही नहीं लगाए जा सके। जिससे अंचल में पिछले बरसाती मौसम में जितनी भी बारिश हुई उसका पानी भी ब्यर्थ बह गया। महाराजपुर अंचल को ही लें तो यहां की कुम्हेड़ नदी के स्टापडेम अधिकारियों की मनमानी की कहानी बयां कर रहे है। गांवों में बारिश का पानी रोकने के लिए शासन स्तर से रोजगार गारंटी योजना के तहत 35 35 लाख रुपए की लागत से नदी नालों पर स्टापडेम बनाए गए थे लेकिन उनमें गेट न लगने से जितना पानी बरसा उतना बहकर निकल गया। ऐसे में आसपास के सभी जल स्त्रोत रीते पड़े हैं और तेजी से भूजल स्तर गिर गया है। ग्रामीण अंचल के सभी सार्वजनिक कूप साथ छोड़ चुके हैं। शासन स्तर से सार्वजनिक कूप खनन योजना इस अंचल के लिए जलसंकट से मुक्ति दिलाने का संदेश लेकर आई थी लेकिन कंुए ठीक से खोदे नहीं गए और योजना कागजों तक सीमित रह गई। जो पुराने कंुए थे वे गंदगी से पटे पड़े हैं उनकी झिरें बंद हो गई हैं। गौरतलब है कि कूप खनन योजना के सरकारी आंकड़ों में भले ही योजना की सफलता की कहानी दर्ज हो लेकिन सही मायने में यह योजना भी फर्जी आंकड़ों तक ही सिमट गई है। रही बात हैंडपंपों की तो गांव में 80 प्रतिशत से अधिक हैंडपंप या तो खराब हालत में हैं या फिर नाम के लिए काम कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जल परिवहन के लिए जो टैंकर थे वे या तो टूट फूट चुके हैं या फिर पुराने सरपंचों या रसूखदारों के घरों की शोभा बने हैं। ग्रामीण पानी के लिए परेशान भटक रहे हैं।

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पार्षदों की मेहरबानी से मिलते हैं पानी के टैंकर

कस्बा हरपालपुर में पिछले कई वर्षों से पानी की समस्या विकराल रूप धारण किए है। यहां फिलवक्त टैंकरों से सप्लाई हो रही है, लेकिन यह सप्लाई पार्षदों की मेहरबानी पर ही निर्भर है। महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हरपालपुर कस्बे के वार्ड पानी के संकट से जूझ रहे हैं। जलसंकट ग्रस्त वाडोर् में नगर परिषद द्वारा भेजे जाने वाले टैंकरों के आते ही पानी के लिए मारा मारी मच जाती है। नगर की राजा कालोनी में पानी की सबसे अधिक समस्या है, यहां लोग पानी के लिए नगर पालिका द्वारा भेजे जाने वाले टैंकरों पर निर्भर हैं। स्थानीय वाशिंदों का आरोप है कि वार्डों में भेजे जाने वाले टैंकर पार्षदों की मेहरबानी पर अपने चहेतों के यहां पहले भेजे जाते हैं। गौरतलब है कि नगर परिषद हरपालपुर के पास जल प्रदाय के लिए एक टंकी और 19 बोर हैं। इनमें से अधिकांश ड्राई हो जाने के कारण समस्या गंभीर हो गई है। वर्तमान में टैंकरों से पानी की सप्लाई की व्यवस्था तो की गई है पंप से सप्लाई होने वाले टैंकर तीन दिन में लगभग 90 चक्कर लगा रहे हैं तो 70 से 80 टैंकर रोजाना भेजे जा रहे हैं। खास बात ये है कि 4 साल पहले बीआरजीएफ योजना के तहत नगर के 15 वार्डों में 18 लाख की लागत से ओपिन पाइप लाइन डाली गई थी जो अभी तक जोड़ी नहीं गई, कई स्थानों से पाइप चोरी हो चुके हैं। इस तरह से सीमित संसाधनों से जलापूर्ति में बाधा आ रही है।

नोट समाचार के साथ फोटो 06 एवं 07 का केप्सन है

छतरपुर। बड़ामलहरा अंचल की काठन में नाममात्र का पानी। 06

छतरपुर। रेत उत्खनन के काम आ रही उर्मिल नदी। 07