तामिया (निप्र)। सरकार दूरदराज के ग्रामों में जनस्वास्थ्य के लिए दीनदयाल चलित अस्पताल के लिए लाखों रुपए खर्च कर रही है। वहीं एम्बुलेंस में संचालित चलित अस्पताल की मैदानी हकीकत यह है कि उसमें ना तो डॉक्टर है और ना ही दवाएं। तामिया सहित जिले में चार बिछुआ, हर्रई और जुन्नारदेव विकासखंडों में दीनदयाल चलित अस्पताल संचालित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के साप्ताहिक हाट बजारो में वहां आने वाले ग्रामीणों के उपचार लिए प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रतिमाह लाखों खर्च करने के बाद भी दीनदयाल चलित अस्पताल योजना का संचालन करने वाले स्वंयसेवी संगठन केजीएन महज औपचारिकता पूरी कर शासकीय राशि का दुरुपयोग कर रहे हैं।

बैतूल का एनजीओ केजीएन कर रहा है संचालन

बैतूल की ख्वाजा गरीब नवाज वेलफेयर सोसायटी को छिंदवाड़ा, बैतूल, बुरहानपुर और डिंडौरी जिले में दीनदयाल चलित अस्पताल के संचालन का ठेका मिला है। ख्वाजा गरीब नवाज वेलफेयर सोसायटी बैतूल के संचालक फिरोज पटेल और छिंदवाड़ा में केजीएन का कर्मचारी बंटी परतेती गाड़ियों के संचालन और वित्तीय कामकाज और डॉक्टरों की नियुक्ति करने उन्हें हटाने के लिए अधिकृत हैं। बिना अनुभव वाले व्यक्ति के पास स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में चलित अस्पताल की जिम्मेदारी है।

सुविधाएं सिर्फ कागजों में

शासन के नियमानुसार एक अस्पताल में उपलब्ध पूरी सुविधायों की तरह पूरी व्यवस्थाओं से लैस एंबुलेंस वाहन में दीनदयाल चलित अस्पताल संचालित किया जाता है। वहीं कागजों में पूरी सुविधा दर्शाकर एनजीओ चलित अस्पताल के नाम पर ग्रामीण अंचलों में बिना सुविधा दिए सरकार से पूरी राशि वसूल रहे हैं। वहीं लंबे समय से चल रहे दीनदयाल चलित अस्पताल में जीवन रक्षक प्रणाली के लिए अति आवश्यक आक्सीजन सिलेंडर के साथ-साथ अन्य जांचों व उपचार के लिए आवश्यक उपकरण माइक्रोस्कोप, ग़ांव में संदेश देने के लिए साउंड सिस्टम स्पीकर सहित अन्य सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। वहीं सभी प्रकार की दवा होने की अनिवार्यता के बाद भी ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिला पा रहा है। एंबुलेंस में बने इस अस्पताल में एक चिकित्सक (एमबीबीएस) के अलावा लैब टैक्निशियन, एक नर्स, ड्रायवर की व्यवस्था होना अनिवार्य है। वहीं संचालन करने वाले स्वंयसेवी संगठन बीएएमएस और बीएचएमएस चिकित्सकों को रखकर मनमानी कर रहे हैं। वही सूत्रों के मुताबिक 15 हजार के मासिक वेतन पर रखे गए बीएएमएस डॉक्टरों को कभी भी निकाल दिया जाता है, वहीं निकाले गए चिकित्सकों को बकाया भुगतान के लिए भी लटकाया जा रहा है। छिंदवाड़ा जिले में प्रतिमाह लगभग साढ़े पांच लाख रुपए से भी अधिक खर्च के बाद भी सुविधाएं ना के बराबर हैं।

दोपहर बाद आता है अस्पताल

आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने स्थापित चलित अस्पताल गिने चुने पांच-सात ग्रामीणों का इलाज कर खानापूर्ति कर रहे हैं। छिंदी क्षेत्र के ढौडमुयार ग्राम के युवा राजु कुडोपा बताते हैं कि लोटिया के साप्ताहिक बजार में चलित अस्पताल वाले दोपहर बाद पहुंचते हैं। वही बंधी बोदलकछार से बाजार के दिन आने वाले राजकुमार बताते हैं कि मैंने आज तक चलित अस्पताल नहीं देखा।

बीएमओ करते हैं निगरानी

जिले के चार विकासखंडों में खंडचिकित्सा अधिकारी चलित अस्पतालों की निगरानी करते हैंं वहीं एनआरएचएम की फंडिंग से चलने वाले दीनदयाल चलित अस्पतालों में हर साल मेडिकल, पैरामेडिकल स्टाफ और दवाइयों का खर्च लगभग 66 लाख रुपए से भी अधिक पर पहुंच जाता है। कहने को चारों ब्लॉकों में बीएमओ निगरानी करते हैं लेकिन एनजीओ अपने हिसाब से चलित अस्पताल का संचालन कर रहे हैं।

जांच की जाए तो होगा खुलासा

दीनदयाल अस्पताल के वाहन भी अच्छी स्थिति में नहीं हैं। जिले में दीनदयाल चलित अस्पतालों में अक्सर चिकित्सक बदल रहे हैं। वहीं एनजीओ द्वारा स्वास्थ्य विभाग को भेजी जाने वाली रिपोर्ट का मैदानी इलाकों के हिसाब से सत्यापन किया जाए तो दी जाने वाली और उपलब्ध सुविधाओं की कलई खुला जाएगी।

झोलाछाप डॉक्टर कर रहे इलाज

एक डॉक्टर ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि रुपए बचाने के लिए संचालन करने वाले एनजीओ मिलीभगत कर जुन्नाारदेव ब्लॉक में फर्जी डॉक्टर रखकर काम करवा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को जोखिम बना हुआ है। चलित अस्पताल में 60 तरह की दवाओं को रखने के प्रावधान है। वहीं दीनदयाल चलित अस्पताल में बमुश्किल से दस तरह की दवाएं उपलब्ध रहती हैं।

नहीं हुआ संपर्क

प्रयास के बाद भी ख्वाजा गरीब नवाज वेलफेयर सोसायटी बैतूल के संचालक फिरोज पटेल और छिंदवाड़ा में केजीएन के कर्मचारी बंटी परतेती से संपर्क नहीं हो सका।

कार्रवाई होगी

तामिया ब्लाक में चलित अस्पताल को पूरी सुविधाएं देने पहले पत्र लिखा गया था। इनके बजट की जानकारी जिले से मिल पाएगी, इनका भुगतान जिले से होता है। चलित अस्पताल वाहन की जांच की जाएगी। कमियां पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।

डॉ.अशोक भगत , विकासखंड चिकित्सा अधिकारी , तामिया