छिंदवाड़ा। जिस किसान मेले में अन्नदाता को नई तकनीक और शासन की योजनाओं की जानकारी देना थी, वहां अन्नदाता पेट भरने को तरस गया। पहले जो मठा बांटा गया उसमें कचरा मिला था। यही नहीं निजी कंपनी के मठे में एक्सपायरी डेट भी नहीं लिखी थी।

प्रभारी मंत्री गौरीशंकर बिसेन एक घंटे की देरी से कार्यक्रम में पहुंचे। इस दौरान भूखे प्यासे किसानों को जो खाना बांटा गया वह भी बासा था। वहीं कुछ किसानों को बासा भोजन भी नसीब नहीं हुआ। जिसके बाद नाराज किसानों ने जमकर हंगामा कर दिया। कुछ लोगों ने खाना अधूरा छोड़कर भूखे ही वापस लौट गए। हालांकि कृषि विभाग के अधिकारी खराब खाने की शिकायत से इंकार कर रहे हैं, लेकिन हकीकत ये है कि किसान खाना खा ही नहीं पाए।

गौरतलब है कि रविवार को जिले से बालाघाट गए किसानों की भी दुर्गति हुई थी। यहां से 150 बसों में भरकर किसानों को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में ले जाया गया, लेकिन वहां किसान पानी और भोजन को तरस गए। हालत ये हुई कि एक किसान तो बेहोश ही हो गया था। इसके बाद भी कृषि विभाग ने कोई सबक नहीं लिया।

सोमवार को हुए कार्यक्रम में किसान बासा खाना मिलने और अव्यवस्था को लेकर सीधे मंच पर जा पहुंचे। वहां मौजूद अधिकारियों ने अव्यवस्था को लेकर जमकर बहसबाजी की। किसानों ने अधिकारियों से साफ शब्दों में कह दिया कि जब तक व्यवस्था नहीं संभलती तो इतने लोगों को क्यों बुलवा लेते हो। बुलाने के बाद खराब खाना खिला रहे हो। यहां तक किसान पानी के लिए तक तरस जाता है। इस तरह अधिकारियों और किसानों की बहस हो गई। इसके बाद अधिकारियों ने जैसे तैसे किसानों को समझाया और भोजन व्यवस्था कराई। हालांकि कई किसान पंडाल छोड़कर चले गए। उन्होंने कह दिया कि हम इतने सक्षम हैं कि खाना होटल में खा सकते हैं। इधर खाने के इंतजार में सैंकड़ों किसान भोजन की आस में बैठे थे। जैसे ही दोबारा भोजना आया फिर आधे किसानों को मिला आधे किसान लौट गए। इस तरह भोजन की अव्यवस्था से किसानों में खासी नाराजगी देखी गई।

बंटा बासा भोजन, कचरे वाला मही

दूर-दराज से आए किसानों को बांटे गए भोजन से बदबू आ रही थी। इस कारण किसानों ने भोजन परिसर में ही फेंक दिया। जहां तहां भोजन बिखरा हुआ पड़ा था। वहीं किसानों को गर्मी से राहत दिलाने बांटा गए मही को पेड़ के नीचे खुला रख दिया था। जिसके कारण मही में पेड़ की पत्तियां गिर गई थी। इसके बाद विभाग के कर्मचारियों ने मही के बर्तन में कपड़ा लाकर ढंका। इस तरह किसानों को खराब भोजन और कचरे वाला मही बांटा गया।

नहीं दी मेले की जानकारी

जिले भर के किसानों ने मेले में शिरकत की थी। सभी ब्लाक से कृषि विभाग और किसान मि़त्रों को किसानों को लाने का जिम्मा सौंपा गया था। जबावदार अधिकारियों, कर्मचारियों और किसान मि़त्रों ने किसानों से यह कहा कि मेले में चलना है। मेले से किसानों को क्या लाभ मिलेगा ऐसी कोई जानकारी नहीं दी। जब पांढुर्ना के साजपानी निवासी किसान नरेंद्र कुमरे मेले में पहुंचे और उससे पूछा गया कि यहां क्यों आए हो तो उन्होंने बताया कि साहब बोले है मेले में चलना है। ऐसा जवाब एक नहीं बल्कि सैंकड़ों किसानों से जवाब मिले।

अचानक बढ़ गई थी भीड़

किसानों के लिए ताजा भोजन बनवाया गया था। वही भोजन उन्हें बांटा गया है। किसानों की भीड़ बहुत अधिक हो गई थी। उन्हें समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन नहीं माने और एक दम खाने पर टूट पड़े। इससे भोजन बांटने में दिक्कत का सामना करना पड़ा। हालांकि इसके बाद किसानों को एक एक भोजन बांटा गया - केपी भगत, उप संचालक कृषि विभाग