ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि । छह साल की मासूम की मां इस दुनिया में नहीं है। पिता दूसरी महिला के साथ चला गया। घर में अकेली बूढ़ी दादी जो अपना ही ख्याल रख नहीं पाती हैं। ऐसे में 6 साल की नातिन की परवरिश करने वाला फिलहाल कोई नहीं है। यह मामला जब महिला एवं बाल विकास विभाग के सामने आया तो विभाग ने स्पांसरशिप योजना के तहत बच्ची की बेहतर परवरिश के लिए उसे शिशु गृह या बालिका गृह में रखने के लिए अनुशंसा की और बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया।

30 दिन से तारीख और सुनवाई के बीच बच्ची की परवरिश अटकी है। इससे साफ है कि बच्चों के लिए बनाई समिति बच्चों के लिए ही संवेदनशील नहीं है। बच्ची को देख समिति तो नहीं पसीज सकी लेकिन एक महिला पुलिसकर्मी को उस पर तरस आया और उन्होंने आगे आकर बच्ची की देखभाल शुरू कर दी।

ग्वालियर के रतवाई इलाके में रहने वाली करीब 6 साल की बच्ची पिंकी (परिवर्तित नाम) की मां का देहांत हो चुका है। बच्ची का परिवार बेहद गरीब है, मां के देहांत के बाद पिंकी का पिता किसी दूसरी महिला के साथ घर छोड़कर चला गया। परिवार में अकेली दादी जो काफी उम्रदराज हैं। मासूम पिंकी की देखभाल से लेकर उसकी पढ़ाई लिखाई व खर्च उठाने में दादी असमर्थ हैं।

घर की माली हालत ऐसी नहीं कि दादी अपना और मासूम का ख्याल रख पाएं। ऐसे में महिला एवं बाल विकास विभाग ने पिंकी के लिए प्रयास शुरू किए और शिशु गृह में उसे रखवाने के लिए एक माह पहले बाल कल्याण समिति के समक्ष मामला रखा। समिति ने शिशु गृह और बालिका गृह में भेजे जाने को लेकर बातचीत की लेकिन किसी भी गृह में भेजने के लिए अभी तक आदेश नहीं मिल सका है।

महिला पुलिसकर्मी ने दिखाई दरियादिली -

महिला पुलिसकर्मी पुष्पा को जब इस बच्ची के बारे में पता चला कि पिंकी की परवरिश करने वाला कोई नहीं है तो पुष्पा ने बच्ची की देखरेख घर पर करना शुरू कर दी। पिंकी जब दादी के घर जाना चाहती है तो उसे वहां छुड़वा दिया जाता है और खाने पीने व अन्य चीजों को लेकर महिला पुलिसकर्मी उसका ध्यान रखती हैं। पुष्पा ने बताया कि बच्ची की देखरेख जरूरी है और समिति के आदेश अभी नहीं हुए हैं।

ऐसी कैसी जिम्मेदारीः बच्ची को कुछ हो जाए तो किसकी चूक -

खाने पीने से लेकर दूसरी बुनियादी जरूरतों को तरसती बच्ची का मामला सामने आने के बाद भी महीना भर बीत चुका है। बच्चों के हितों के लिए काम करने वाली बाल कल्याण समिति को ही बच्ची की हालत नहीं दिख रही है। फिजिकली बच्ची इतनी कमजोर है कि करीब 6 साल की उम्र होने के बाद भी वह देखने में 4 साल की लगती है। पहले से बच्ची को पोषण और देखभाल नहीं मिली। अब और बच्ची का मामला लटका हुआ है। अगर बच्ची को कुछ हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

समिति के आदेश का इंतजार है -

6 साल की मासूम बच्ची को परवरिश की जरूरत है उसकी दादी उसे पालने में असमर्थ है। बच्ची को गृह में भेजकर उसकी देखभाल कराना जरूरी है। समिति के समक्ष मामला पेश किया जा चुका है लेकिन आदेश होने का इंतजार है।

शालीन शर्मा, जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी,ग्वालियर