-बीयू के महिला अध्ययन विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू, वक्ताओं ने रखे विचार

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

मानव तस्करी को रोकने के लिए नया कानून आ रहा है। पहले के कानून में कई कमियां थी। नए कानून में प्रकरणों की रिपोर्टिंग और निराकरण के लिए भी कारगर प्रावधान है। तस्करी रोकने के लिए कानून का सही ढंग से पालन और लोगों में जागरूकता होना जरूरी है।

यह बात चेन्नई से आई पूर्व आईएएस बी भामती ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बीयू के महिला अध्ययन विभाग में आयोजित दो दिनी राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन कही। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी की समस्या मांग पर अधारित है। इस संबंध में ऐसे उपाय किए जाना चाहिए, जिससे की मांग समाप्त हो जाए। सबसे ज्यादा इसकी मांग पंजाब, हरियाणा और उतरप्रदेश में है, जबकि बिहार, ओडिशा व झारखंड से सबसे ज्यादा मानव तस्करी की जाती है। संगोष्ठी के दौरान अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग क्लब की आवश्यकता

संगोष्ठी में मुंबई से आए डॉ. पीएम नायर ने कहा कि जिस तरह हर चीज के लिए क्लब बने हैं, वैसे ही मानव तस्करी रोकने के लिए भी एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग क्लब होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2016 की रिपोर्ट के अनुसार 55 हजार बच्चियों का पता ही नहीं है। चाइल्ड मिसिंग की रिपोर्ट ही दर्ज नहीं होती। इसमें गलती माता-पिता की भी है। पुलिस को ही दोष क्यों दे। मानव तस्करी रोकना किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। समाज को संवदेनशील बनना होगा। इस संबंध में कितने भी कानून बन जाए, जब तक आप जागरूक नहीं होंगे। तब तक कानून से कुछ नहीं होने वाला।

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पीड़ितों का पुनर्वास जरूरी है

कार्यक्रम में डीजी लोकायुक्त अनिल कुमार ने कहा कि पीड़ितों का पुनर्वास महत्वपूर्ण है। वर्तमान में इसकी जवाबदारी विभाग एवं एजेंसियां निभा रही है। इससे काम ठीक से नहीं हो पा रहा। पुनर्वास का दायित्व एक ही एजेंसी या विभाग को सौंपना होगा। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी रोकने के लिए कई विभाग की ओर से योजनाएं चल रही है, इसमें वन स्टॉप सेंटर जैसी संस्था भी है, लेकिन फिर भी चाइल्ड मिसिंग को हम रोक नहीं पा रहे। मानव तस्करी पर रिसर्च मैथेडोलॉजी की जरूरत है। ग्राउंड लेवल पर काम करने की जरूरत है। पुलिस तो अपना दायित्व निभा रही है, लेकिन इसमें विभिन्न एजेंसियों और विभागों को भी मिलकर काम करना होगा।