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    12 महीने रहता है पेयजल संकट

    Published: Thu, 07 Dec 2017 10:47 PM (IST) | Updated: Thu, 07 Dec 2017 10:47 PM (IST)
    By: Editorial Team

    बनवार। नईदुनिया न्यूज

    भले ही जिले का जलसंकट दूर करने शासन के द्वारा लाखों रुपए की राशि खर्च की जा रही हो, लेकिन जनपद अंतर्गत आने वाले कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां वर्ष भर पेयजल संकट बना रहता है। वनांचल में रहने वाले लोग पेयजल स्रोत से वंचित हैं। यहां शासन, प्रशासन के द्वारा पेयजल सुविधा मुहैया नहीं कराई गई है। वनांचल में बसे गांव सलैया, टपरियां, गोला पटी, करके , खेड़ार, पड़री, देवतरा, झादा, सुरेखा आदि के साथ कई गांव में पानी के लिए आज भी लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है।

    स्टेशन टपारियां में दो सौ की आबादी के बीच एक भी पेयजल स्रोत नहीं है। लोगों को मजबूरी में बरसाती नाले की पोखर में गड्ढा खोदकर पानी की पूर्ति करनी पड़ती है। यही हाल सगरा ग्राम पंचयात के पड़री टोला का है जहां पर पेयजल स्रोत न होने की वजह से यहां रहने वाले 48 घरों के कोल आदिवासी समुदाय के लोग एक गहरी गुफा से पीने का पानी लाते हैं। देवतरा झादा सुरेखा में भी पेयजल स्रोत हेंडपंप तो हैं, लेकिन भूजल स्तर में गिरावट के चलते एक झिरिया के भरोसे पूरा गांव निर्भर है। गांव के स्थानीय निवासी महेंद्र यादव, मुलाम सिंह ने बताया कि इन टोलों के लिए पेयजल स्रोत नहीं है। इसलिए बारह महीना पीने के पानी की समस्या बनी रहती है।

    बीते वर्ष विधायक के द्वारा इन गांव में हैंडपंप खनन करवाने का प्रयास किया गया, लेकिन पीएचई विभाग की बोरवेल मशीनें बारिश के समय गांव तक नहीं पहुंचीं। इस संबंध में जबेरा विधायक प्रताप सिंह का कहना है कि अब ठंडी के मौसम में ही सलैया, टपरिया, पड़री में बोर करने वाली मशीन भिजवाकर हैंडपंप खनन करवाया जाएगा। इन गांव की पेयजल समास्या समाधान करवाना हमारी प्राथमिकता है।

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