मड़ियादो। नईदुनिया न्यूज

एक महीने बाद चुनावी बिगुल बजने वाला है जिसकी तैयारियों में प्रशासन जुटा हुआ है। जिसकी तैयारियों के लिए प्रशासन द्वारा स्थानीय स्तर पर बूथ केंद्रों का चयन कर वहां व्यवस्थाएं जुटाना शुरू कर दिया गया है। मतदान शत प्रतिशत हो इसके लिए प्रशासन द्वारा काफी काम किए जाते हैं, लेकिन मतदान केंद्र का फासला ही इतना दूर हो कि मतदाता को वहां जाने के पहले सोचना पड़े तो फिर आप क्या कहेंगे। हटा जनपद के मड़ियादो क्षेत्र से जुटे आधा दर्जन मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को जाने के लिए 10 किमी का सफर तय करना होगा। वह भी उस जगह जहां आवागमन के साधन ही न हों और सफर करने के लिए जंगल का रास्ता हो। अधिकारियों का कहना है कि मतदान केंद्र आज से नहीं बल्कि पहले से बने हैं।

ऐसा नहीं है कि मतदान को लेकर प्रशासन द्वारा मतदाताओं की सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा जाता है, लेकिन मतदान केंद्र से गांव तक की दूरी मतदाताओं की परेशानी को बढ़ा सकती है। आदिवासी अंचल के तीन मतदान केंद्रों पर एक दर्जन से अधिक गांव के मतदाता मतदान करेंगे जो पांच से दस किमी तक की दूरी तय कर पहुंचेंगे।

यह हैं मतदान केंद्र

दमोतीपुरा मतदान केंद्र पर दमोतीपुरा, ढूला, सूरजपुरा और मनकपुरा गांव के लोग मतदान करेंगे। इसी तरह घोघरा मतदान केंद्र पर कारीबरा, भूलखेड़ा, कलकुआ, घोघरा, जुनेरी टोला, मजरा टोला के लोग मतदान करेंगे। बछामा मतदान केंद्र पर ढोरिया, बछामा, बनौली और श्यामरसिंगी के लोग मतदान करेंगे। यह दूरी इन केंद्रों पर मत डालने वालों के लिए समस्या है।

जाने के लिए सिर्फ पैदल मार्ग है

आदिवासी अंचल के इन गांव में आवागमन के साधन पैदल मार्ग ही हैं। मतदान केंद्र दमोतीपुरा पर ग्राम ढूला के मतदाता सर्वाधिक दूरी 10 किमी तय कर मत देने जाएंगे। इसी तरह ग्राम ढोरिया के मतदाता बछामा मतदान केंद्र जाने के लिए जंगल के रास्ते पांच किमी का सफर तय करेंगे। यदि वह मुख्य सड़क से जाते हैं तो उन्हें 32 किमी चलकर मतदान केंद्र तक पहुंचना होगा। इसी तरह बनौली के मतदाताओं को मतदान केंद्र पहुंचने के लिए दो किमी का पहाड़ी रास्ता तय करना होगा। मतदान केंद्र पाटन पर झरयार के करीब पांच मतदाता सात किमी चलकर पहुंचेंगे। वहीं घोघरा मतदान केंद्र पर कारीबरा के मतदाता पांच किमी का सफर तय करेंगे।

जंगल के रास्ते हो सकते हैं खतरनाक

आदिवासी अंचल के यह वाशिंदे आवागमन के लिए अधिकांश जंगल के रास्तों का उपयोग करते हैं जो उन्हें लंबी दूरी से बचाता है। इसी क्रम में लंबी दूरी पर बनाए गए मतदान केंद्र पर पहुंचने के लिए मतदाता जंगल के रास्ते जाएंगे। बफरजोन बनने के बाद इन जंगलों में वन्य प्राणियों की संख्या में इजाफा हुआ है और तेंदूओं की संख्या भी बढ़ी है जो मतदाताओं के लिए चिंता का विषय है।

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मतदान केंद्र आज से नहीं बहुत पहले से बने हैं और इनको बनाने का काम निर्वाचन आयोग का रहता है। निर्वाचन आयोग को लिखकर भेजते हैं यदि कुछ सुधार हो सकता है तो वहीं से होना है।

- आनंद कोपरिहा, उपजिला निर्वाचन अधिकारी