दमोह। नईदुनिया प्रतिनिधि

दस लक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म के मौके पर रविवार को दिगंबर जैन धर्मशाला में आचार्यश्री उदार सागर महाराज ने मोक्ष मार्ग पर अपने प्रचवन दिए। आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में टेढ़ामेढ़ा पन हमारे लक्ष्य में बाधक है, वक्रता को दूर किए बिना हम मोक्ष मार्ग पर नहीं बढ़ सकते। यदि मन वाणी और शरीर में टेढ़ापन नहीं है तो हम अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। जहां पर त्रिबिधता है वहीं सबसे ज्यादा खतरनाक है। अर्थात मन कुछ, शरीर से कुछ, वाणी से कुछ।

उन्होंने आगे कहा जो टेढ़ी मेढ़ी चाल से चलता है वह तिर्यंच गति में पहुंचता है। आचार्य श्री ने उत्तम आर्जव धर्म का मर्म समझाते हुए कहा कि अपने जीवन को बदलो, सरल जीवन बनाने का प्रयास करो। यह सरलता वास्तविक होना चाहिए नकली नहीं। हम जितना धर्माचरण करते हैं वह छल कपट से रहित होना चाहिए। आचार्यश्री ने भगवान श्रीराम-लक्ष्मण के वनवास समय के एक प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि वन भ्रमण के दौरान राम ने सरोवर में एक बगुला को सीधा शांत खड़ा देख और सावधानी से एक-एक पैर रखकर चलते हुए देख कर कहा कि देखो लक्ष्मण यह बगुला कितनी धार्मिक प्रवृत्ति का है। जिस पर सरोवर की एक मछली बोली अरे राम तुम नहीं जानते इसने तो मेरा सारा कुल ही निर्मूल कर दिया है। यह धार्मिक नहीं है, इसके अंदर हिंसा, छल, कपट भरा पड़ा है। आचार्य श्री ने कहा कि बगुले की प्रवृत्ति के कारण उसके नाम से ऐसे लोगों की निंदा की जाती है, बगुला भगत कहा जाता है। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रावकगण मौजूद थे।