बनवार। नईदुनिया न्यूज

जिले के सबसे बड़े माला जलाशय में मगरमच्छों की संख्या तो बढ़ती ही जा रही है। जलाशय से निकली शून्य नदी के तटीय क्षेत्रों की खेतीहर भूमि के साथ आबादी वाले क्षेत्रों में भी मगरमच्छ देखे जा सकते हैं। तटीय क्षेत्र के गांव माला, इमलिया, चिलोद, महुआखेड़ा से मगरमच्छ को पकड़कर रानी दुर्गावती अभयारण्य के सिंगोरगढ़ जलाशय में अभी तक एक दर्जन छोटे, बड़े मगरमच्छ छोड़े गए। नोहटा ग्राम की व्यारमा नदी के घाट जहां पर लोगों की आवाजाही रहती हैं वहां मगरमच्छ धूप सेंकते देखे जा सकते हैं। जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। स्थानीय निवासी परषोत्तम राय उर्फ पप्पू का कहना है कि नोहटा गांव के समीप निकली व्यारमा नदी के सार्वजनिक घाटों पर चार से अधिक संख्या में मगरमच्छ निरंतर दिखाई दे रहे हैं। जिससे ग्रामीणों ने नदी आना ही बंद कर दिया है। ग्रामीणों को नदी के पानी का उपयोग करने में भी डर लगा रहता है। इस ओर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।