दमोह। नईदुनिया प्रतिनिधि

लगातार पिछले चार से पांच वर्षों से प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे कि सानों के सामने फिर संकट आकर खड़ा हो गया है। क्योंकि कि सान की फसल तैयार हो गई है और वहीं बारिश के साथ ओले गिरने का क्रम शुरू हो गया है। जिससे जिन कि सानों की फसल कटकर रखी है उन्हें तो नुकसान होगा ही और जिन कि सानों की फसल कटने के लिए खेत में खड़ी है उन्हें भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। रविवार की सुबह जिले के कई स्थानों पर झमाझम तो कहीं थोड़ी बारिश हुई और ओले भी गिरे लेकि न बारिश जितनी भी हुई नुकसान कि सान को ही उठाना पड़ रहा है। वहीं मार्च का महीना आधा बीत चुका है और बारिश होने से फिर मौसम में ठंडक घुल गई है। कु ल मिलाकर मौसम अभी साफ होता नहीं दिखाई दे रहा है।

तेदूखेड़ा में ओलावृष्टि, कि सान बोले फसलों को हुआ नुकसान

फोटो 08 तेंदूखेड़ा। बारिश के कारण खेत में रखी गीली फसल।

तेंदूखेड़ा। नईदुनिया न्यूज

पिछले दो दिनों से फिर मौसम में बदलाव हो गया है। हल्की बूंदाबांदी के बीच आसमान में बादल छाए हुए हैं जिसे देखकर लगता है कि कभी भी जोरदार बारिश हो सकती है। रविवार की सुबह पांच बजे बारिश के साथ ओलावृष्टि शुरू हो गई। जिससे कि सानों की फसल गीली हो गई। कु छ जगह ओलों के कारण फसल के नुकसान होने की बात भी सामने आ रही है।

तेजगढ़ क्षेत्र में गिरे ज्यादा ओले

ब्लाक के सभी क्षेत्रों में सुबह बारिश हुई है वहीं तेजगढ़ में भी बारिश के साथ ओले गिरे। कि सान अनूप लोधी ने बताया कि सुबह हुई बारिश के कारण तेजगढ़ के साथ पटेरियामाल और दिनारी क्षेत्र में ओलावृष्टि हुई है। जिससे फसलों को काफी नुकसान हुआ है। कि सानों की फसल कट चुकी है और खेतों में कटी रखी होने के कारण उनके दानों पर ओलावृष्टि का असर पड़ा है। इसके बाद पूरे दिन क्षेत्र में शीतलहर का प्रकोप रहा।

तेंदूखेड़ा, सैलवाड़ा के साथ तेजगढ़ के सेक्टर में आने वाले गांव में सुबह बारिश के साथ ओले गिरे। वहीं तारादेही क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव में मौसम बिल्कु ल साफ रहा। तारादेही निवासी जिनेश चंदेल द्वारा बताया गया कि हल्के बादल हुए हैं लेकि न बारिश नहीं हुई। नायब तहसीलदार रंजना यादव ने बताया कि सुबह बारिश के साथ कम मात्रा में ओलावृष्टि हुई है। जिसकी जानकारी पटवारियों से लेकर जिले भेजी गई है। अभी नुकसान ज्यादा नहीं हुआ है।

बारिश के कारण गेहूं के दाने की चली गई चमक

फोटो 09 बनवार। बारिश से बचाने ढक कर रखी फसल।

बनवार। नईदुनिया न्यूज

रविवार की सुबह 5 बजे अचानक से हुई बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में कटी रखी फसल को काफी नुकसान हो गया है। वहीं थ्रेसिंग के इंतजार में रखी चना, मसूर, बटरी की फसल भी बारिश में गीली होकर खराब हो गई। खेतो में खड़ी कटाई के लिए तैयार दलहन की फसलों का कटाई कार्य रुक गया। बेमौसम बारिश और आसमान में छाए बादलों से कि सानों के सामने संकट खड़ा हुआ है। क्योंकि यदि जोरदार बारिश होती है तो बहुत बड़ा नुकसान कि सानों को हो सकता है। गेहूं की फसल की खड़ी बाली में बारिश की बूंदे पड़ते ही गेहूं की चमक खत्म हो गई और कटाई कार्य भी एक सप्ताह के लिए पीछे हो गया है। दलहन फसलों के क्षेत्र आभाना से लेकर बीजाडोंगरी, गूढ़ा अमतरा, मुड़ारी, बनवार, घटेरा, गोलापट्टी, लरगुवां, मुवार, झरौली, कु समी, करियाखेड़ा, पटना, गुबरा, सिंगपुर, घाना, जलहरी, गड़िया, चंदपुरा, बलारपुर, बगलवारा, सिमरी, जालम, डूमर, बड़गुवां, लखनी आदि गांव में चनाए बटरी, मसूर, धना की फसलें खेतों में कटाई के लिए खड़ी हैं। गेहूं की कटाई के लिए खड़ी फसलों के क्षेत्र बनवार, घुटकु आं, छपरवहा, सिमरी, पोंड़ी गांव में किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है। यदि बारिश होती है और धूप नहीं निकलती तो कि सानों की फसल के दाने की चमक पूरी तरह चली जाएगी।

कि सान मानसिंह, मुन्ना सिंह, भारत सिंह, गोरेलाल, मलखान सिंह ने बताया कि रविवार को हुई ओला और बारिश से दलहन फसलों को भारी नुकसान हुआ है। थ्रेसिंग के लिए खेतों में रखी फसल गीली हो गई है और यदि धूप नहीं निकलती तो फसल सड़ने का खतरा पैदा हो जाएगा। कृषि विस्तार अधिकारी तरवर सिंह का कहना है कि बेमौसम बारिश से दलहन फसलों को अब नुकसान होना तय है। वहीं गेहूं के दाने की चमक भी खत्म होने का खतरा बना हुआ है। मौसम साफ हो जाता है तो किसानों का संकट कम हो जाएगा। क्योंकि बारिश से सिर्फ नुकसान ही होना है।

तीन मवेशियों पर गिरी गाज, मौत

बनवार। बांदकपुर चौकी के आखरी गांव खड़ेरा टोरिया से कु छ दूर रविवार की सुबह खेत में चल रहे चार मवेशियों पर गाज गिरने से तीन की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार भगवत पिता इमरत सिंह आदिवासी की एक भैंस, बछड़ा व गाय गांव के समीप खेत में चरने गई थी। तभी आकाशीय बिजली धमक से मौके पर उनकी मौत हो गई। जिसकी रिपोर्ट बांदकपुर चौकी में दर्ज कराई गई है।

बारिश से कि सान के चेहरे पर चिंता की लकीरें

फोटो 06 सिग्रामपुर। झमाझम बारिश से सड़कों पर भरा पानी।

सिग्रामपुर। रविवार की सुबह अचानक हुई बारिश ने फिर कि सानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। क्योंकि पिछले कई वर्षों से लगातार प्राकृतिक आपदा के कारण फसलें खराब होती जा रही हैं और कि सान टूटता जा रहा है। जब फसल अच्छी आने की उम्मीद रहती है तो उस पर बारिश पानी फे र देती है। रविवार को सुबह 6 बजे से बारिश शुरू हुई और आधे घंटे तक लगातार हुई बारिश से सड़कें पानी से सराबोर हो गईं। वहीं कि सान इस बात से चिंतित था कि कई कि सान की फसल कटकर खेत में रखी है और कु छ की फसल खेत में खड़ी है। कि सान प्रशांत प्यासी, अवधेश जैन, गुमान सिंह आदि ने बताया कि हमारे खेत में चने की फसल कटी रखी है। शनिवार को मौसम साफ था इसलिए कटाई करवा ली लेकि न रात में अचानक से आसमान में बादल छाए जिसे देखते ही हमारी नींद उड़ गई और सुबह से बारिश शुरू हो गई। जिस प्रकार से मौसम बना हुई उसे देखकर लगता है कि दो से तीन दिन इसी तरह मौसम खराब रहेगा।

सुबह हुई बारिश से भीगी कि सानों की फसल

नोहटा। रविवार की सुबह तकरीबन पांच बजे मौसम में फिर बदलाव हुआ और बादलों की चमक के साथ बारिश शुरू हो गई। हालांकि पहले बारिश रुक-रुक कर हुई और सात बजे से फिर बारिश तेज शुरू हो गई। जिससे कि सानों की कटी फसल भीग गई और उनका काफी बड़ा नुकसान हो गया। बेमौसम बारिश ने कि सानों की कमर तोड़कर रख दी है।