कैलाश दुबे, उपेंद्र प्यासी, दमोह/पटेराबच्चे रोज स्कूल आएं और उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलें, इसी सोच के साथ एक शिक्षक ने खुद सवा लाख रुपए खर्च कर सरकारी स्कूल की तस्वीर बदलकर रख दी। हम बात कर रहे हैं पटेरा ब्लॉक के इटवा संतोष गांव के शासकीय नवीन प्राथमिक स्कूल में पदस्थ 50 वर्षीय शिक्षक अरुण कुमार कस्तौर की। अरुण कहते हैं कि आा जीवन बीत जाने के बाद उन्हें शिक्षक की नौकरी मिली, इसलिए वह कुछ ऐसा करना चाहते थे, जिससे बच्चों का भविष्य संवर सकें और शिक्षा में उनकी लगन लग जाए।

दरअसल, जब अरुण ने अभिभावकों से उनके बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजने की बात कही तो उनमें से कई ने इसे नहीं माना। इस पर अस्र्ण ने स्कूल का नक्शा बदलने की ही ठान ली। स्वयं के पास से 70 हजार और बाजार से 50 हजार रुपए का सामान उधार लेकर बच्चों के लिए संसाधन जुटा दिए।

यह सुविधाएं उपलब्ध कराईं

लकड़ी की डेस्क, प्रोजेक्टर, दीवारों पर रंग-पेंट, पुट्टी, इंडोर गेम्स, फर्स्ट एड बॉक्स, स्कूल परिसर में पौधे, शिक्षक और बच्चों के पहचान पत्र। अस्र्ण के अलावा पदस्थ शिक्षक लटोरीलाल पटेल दोनों निर्धारित ड्रेसकोड में ही स्कूल आते हैं। तीन कमरे के स्कूल में दर्ज बच्चों की संख्या 37 है।

42 की उम्र में मिली नौकरी

अरुण ने बताया कि उन्हें काफी मेहनत के बाद 42 वर्ष की उम्र में शिक्षक की नौकरी मिली। सेवा में आते ही उन्होंने सोचा कि आगे चलकर वे इस स्कूल के बच्चों को ऐसी शिक्षा और वातावरण उपलब्ध कराएं कि उन्हें जीवन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। इसके लिए उन्होंने अपने वेतन में से कुछ रुपए बचाना शुरू कर दिए। अरुण को उनके इस काम में पत्नी रेखा का भी सहयोग मिला।

दूसरे शिक्षक लें प्रेरणा

शिक्षक का यह प्रयास सराहनीय है। दूसरे शिक्षकों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए। 26 जनवरी को शिक्षक को सम्मानित करने प्राचार्य से अनुमोदन मांगा जाएगा - पीपी सिंह, सहायक संचालक शिक्षा

शिक्षक द्वारा स्कूली बच्चों को दी गई सुविधा सराहनीय है। मैं स्वयं स्कूल देखने जाऊंगा और जो भी मदद होगी उपलब्ध कराएंगे - हेमंत खेरवाल, डीपीसी