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    एक घंटे इंतजार कराया, 108 एंबुलेंस में नहीं था ऑक्सीजन, निजी वाहन से ग्वालियर रेफर हुआ मरीज

    Published: Fri, 08 Dec 2017 09:12 AM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 09:12 AM (IST)
    By: Editorial Team
    7 dec dp 04 08 12 2017

    जिला अस्पताल में मरीजों की नहीं मिल रही सुविधाएं, लगातार सामने आ रही लापरवाही की घटनाएं

    फोटो 04 निजी वाहन से मरीज को रेफर करवा कर ग्वालियर ले जाते परिजन ।

    दतिया। नईदुनिया प्रतिनिधि

    जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए आ रहे मरीजों को लगातार अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। समय पर सुविधाएं न मिलने पर मरीजों की जान तक पर बन रही है। पर जिम्मेदार तंत्र व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं ला पा रहा है। ताजा मामला गुरुवार का है। गुरुवार को सायनी मोहल्ला निवासी इकबाल कुरैशी की तबियत बिगड़ने के बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर दिनेश माटोली ने इकबाल का चेकअप किया। उन्हें बे्रन हैमरेज की शिकायत होने पर डॉक्टर ने परिजनों को मरीज को तुरंत ग्वालियर या झांसी ले जाने की सलाह देते हुए ग्वालियर के लिए रैफर कर दिया। मरीज को ग्वालियर ले जाने के लिए परिजनों ने 108 एंबुलेंस को कॉल किया। कंट्रोल रूम भोपाल में बात हुई पर 108 एंबुलेंस ने अस्पताल आने में काफी देर लगा दी, जिससे परेशान होकर मरीज के परिजन निजी एंबुलेस किराए पर लेकर मरीज को ग्वालियर ले जाने लगे तभी ठीक एक घंटे बाद 108 एंबुलेंस अस्पताल पहुंची। 108 एंबुलेंस के पायलट ने बताया कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन की सुविधा नहीं है। एक घंटे देरी से मरीज को लेने पहुंची 108 एंबुलेंस के पायलट का जवाब सुनकर निराश मरीज के परिजन मरीज को निजी एंबुलेंस से ही ग्वालियर ले गए।

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    सप्लायर ने नहीं दी 108 एंबुलेंस को ऑक्सीजन-

    108 एंबुलेंस सेवा प्रदाता कपंनी के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई देने वाले सप्लायर ने 108 एंबुलेंस चालक को ऑक्सीजन सिलेंडर देने से यह कह कर इंकार कर दिया कि ऑक्सीजन नहीं है, ग्वालियर से आ रही है। 108 एंबुलेंस स्टॉफ का कहना है कि उन्हें भोपाल कॉल सेंटर से मैसेज आया तो वह वाहन में डीजल लेने चले गए तथा ऑक्सीजन लेने गए तो सप्लायर ने इंकार कर दिया जिससे अस्पताल तक आने में समय लग गया।

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    आपात सेवाओं में भी बरत रहे गंभीर लापरवाही-

    जिला अस्पताल में मरीजों को आपात सेवाएं देने में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। पिछले दिनों मेटरनिटी में प्रसव के लिए आई प्रसूता का प्रसव मेटरनिटी के गेट पर ही हो गया था। प्रसूता के परिजनों द्वारा शोर शराबा करने पर जच्चा बच्चा को मेटरनिटी में अंदर लिया गया। इससे पूर्व ग्राम रेंडा निवासी प्रसूता को जिला अस्पताल तक लाने से पहले ही रास्ते में प्रसव होने का मामला सामने आया था। अब 108 एंबुलेंस की लापरवाही फिर सामने आई है, जबकि शासन ने 108 एंबुलेंस वाहनों का संचालन मरीजों, घायलों को आपात चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने की मंशा से किया है। पर 108 एंबुलेंस सेवाएं प्रदाता कंपनी की लापरवाही के कारण मरीजों को 108 एंबुलेंस सेवा का समुचित लाभ नहीं मिल रहा है। मालूम हो कि 108 एंबुलेंस में गंभीर बीमार व घायल मरीज को तुरंत व मौके पर ही प्राथमिक उपचार देने की सुविधा का प्रावधान है।इसी उददेश्य से एंबुलेंस पर पायलट के साथ चिकित्सक तैनात रहता है। पर सुविधाओं के अभाव में 108 एंबुलेंस मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचाने के काम में उपयोग आ रही है।

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    प्रभारी मंत्री की फटकार के बाद भी अधिकारी नहीं कर रहे मॉनीटरिंग-

    जिला अस्पताल का प्रभारी मंत्री मायासिंह ने करीब 3 महीने पहले औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण में व्यापक खामियां मिलने पर सिविल सर्जन व सीएमएचओ को प्रबारी मंत्री ने कड़ी फटकार लगाते हुए व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं जागे। जिले में आपात स्वास्थ्य सेवाओं की मॉनीटंिरंग ठीक से नहीं हो रहा है। जिसका उदाहरण बिना ऑक्सीजन के चल रही 108 एंबुलेंस गाड़ियां है। सुविधाओं के नाम पर एंबुलेंस में आक्सीजन न होना गंभीर बात है। पर जिम्मेदार अधिकारी आपात सेवाओं की मॉनीटरिंग नहीं कर रहे है। जिससे यह स्थितियां बन रही है। अब जब 108 एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर की सुविधा नहीं होगी तो किसी मरीज को उसके परिजन जोखिम उटाकर क्यों 108 एंबुलेंस से ले जाएंगे। उन्हें मजबूरी में निजी एंबुलेंसों की मदद ही लेनी पड़ेगी।

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    इनका कहना है-

    मरीज इकबाल की हालत सीरियस थी, मैंने चेकअप के बाद उन्हें ग्वालियर के लिए रेफर किया था। मरीज के परिजनों ने 108 एंबुलेंस को कॉल किया पर वाहन एक घंटे तक नहीं आया जो बड़ी लापरवाही है।

    डॉ. दिनेश माटोली, चिकित्सक जिला अस्पताल दतिया

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